सफेद साडी वाली वो औरत जो हर रात स्टेशन के पास घुमती थी

यह घटना 2005 की है कि जब मै अपने छोटे भाई और चाचाजी के लड़के साथ अपने गाँव छुट्टियाँ मनाने गया था।हम लोग के साथ गाँव के कुछ लड़के भी आ गए।रात को हम सब साथ ही सोते थे।नानी घर में तो हम आँगन मे।हमारा गाँव उदयपुर के भीमल स्टेशन के पास हैं।तब गाँव मे एक औरत के बारे मेँ बहुत सुना था।वो हर रोज रात को सफेद साडी मेँ स्टेशन के पास घुमती थी।वो औरत कई लोगोँ को नजर आ चुकी है।इसिलिए हम लोगो को रात को वहा घुमने की बिल्कुल भी इजाजत नही थी।हम लोगो के मन मे इस बात को जानने की बहुत उत्सुकता थी।

ghost train

ऐसे ही एक रात हम सब लड़के बाहर सो रहे थे।तभी मेरे छोटे भाई को लघुशंका आई।उस ने फिर मेरे चाचा के लड़के को जगाया।दोनो ही निकल पडे।हमारे आँगन के सामने रास्ता है उसके थोडे आगे घास है और फिर स्टेशन।चाचा जी का लड़का एक तरफ खडा था और छोटा भाई घास की तरफ चल दिया।अपना काम निपटा कर छोटा भाई चाचा के लडके की तरफ मुडा।वो दोनो वापस आ ही रहे थे कि अचानक चाचा का लड़का वही रूक गया।छोटा भाई भी उसके साथ रूक गया।दोनो ने स्टेशन के पास एक औरत को देखा,वो सफेद साडी मेँ थी।स्टेशन के पास अनायास ही भटक रही थी।वो दोनो उसे ही देखे जा रहे थे।छोटे भाइ ने वापस चलने को कहा पर मेरे चाचाजी के लडके को तो खुजली थी।उसने वापस जाने से इनकार कर दिया,और छोटे को साथ लेकर स्टेशन की तरफ चल दिया,यह जानने के लिए की आखिर वो औरत है कौन,और क्योँ लोग वहा ना जाने को कहते है।छोटे के मना करने के बावजुद वो नही माना।

वो स्टेशन की तरफ बढ़ चले थे।पर जब वो स्टेशन पर पहुँचे तब वहा कोइ नही था।अभी अभी तो यही थी कहा चली गइ।बहुत घना अँधेरा था,चारो और जानलेवा सन्नाटा था।छोटा भाइ डर के मारे कांप रहा था,उसने चाचा के लड़के को वहा से तुरंत वापस चलने को कहा,पर वो कहा मानने वाला था।फिर अचानक ही मौसम मेँ ठंड बढ़ गइ।अब तो छोटा बिल्कुल घबरा गया।अब तो चलो भय्या………!छोटे ने चाचा के लड़के से कहा।वो दोनो वापस जाने के लिए पलटे ही थे कि सामने वो सफेद साडी वाली औरत खडी थी।उसका चेहरा बहुत भयानक था,सिर से खुन बह रहा था,आँखोँ की पुतलिया ही गायब थी।उसके दाँत एकदम नुकीले।उसे देखकर तो वो दोनो बुरी तरह घबरा गये।क्या करे ना क्या ना करे कुछ समझ नही आ रहा था।दोनो एक ही बर्फ की तरह वही जम गये थे।उनके मुँह से तो आवाज भी नही निकल रही थी।छोटे ने हिम्मत करके चाचा के लड़के का हात पकडा और दौड़ने लगा।मगर उस औरत अपने हाथ बडे करके चाचा के लड़के को पकड लिया,मगर छोटा बच गया।उस औरत ने चाचा के लड़के को अपने पास खिचा और बहुत ही भयानक आक्रोश कर रही थी।

stationghost

छोटा वहा से कैसे भी करके अपने घर की तरफ भागा और हम सबको जगाया।वो बता भी नही पा रहा था,उसने बस इशारा किया और हम सब वहा दौड पडे।वहा जाकर जो नजारा देखा तो सभी के रौंगटे खडे हो गए।हम भी बुरी तरह से घबरा गए।उस औरत ने चाचा के लड़के के गले को पकड रखा था……….पर अचानक से ही उस औरत के शरीर ने आग पकड ली।अब तो हम और भी घबरा गए।हम रोने पर आ गये,और चाचा का लड़का भी बहुत रो रहा था।और वो औरत भयानक आक्रोश किए जा रही थी।पर हममे से एक लड़का बहुत धीट था। वो फुर्ती से उस औरत की तरफ लपका और जितने भगवान है उन सबके नाम लेने लगा।वो औरत कमजोर पडने लगी।उस लडके ने उन दोनो कस के पकड रखा था।

उसे देखकर हम लोगो मे भी हिम्मत आ गई और हम लोग भी वहा लपक पडे।कुछ ही देर मे वो औरत कमजोर पड गइ और वहा से भाग खडी हुई।चाचा का लड़का बेहोश हो चुका था।हम ने उसे उठाया और अपने घर की तरफ चल दिए।चाचा के लड़के को करीबन १ महिने बुखार रहा,और छोटे भाई को १ हफ्ता।लेकिन उस औरत के बारे मे कुछ पता नही चला।हम मरते मरते बचे उस दिन।इसलिए कहता हूँ कि कभी भी बडो की बात माननी चाहिए और अपनी होशियारी नही दिखानी चाहिए।आज भी हम लोगो के उस घटना के याद आने पर रोंगटे खडे हो जाते है।

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  1. Ashim patra August 4, 2017

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