हॉरर फिल्म देखने के बाद असली भूतो से हुआ सामना | Watching Horror Movie at Night

Watching Horror Movie at Nightमेरा नाम विकी है और मै लाती चौक में रहता हूँ। आज मै अपने साथ हुई भयानक घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ। उस हादसे के बाद मै अपनी परछाई से भी डरने लगा हूँ। डर और आतंक का वह मंज़र याद आने पर आज भी मेरी रूह कांप जाती है। मानों या ना मानों पर मैने उस रात वेहशी दरिंदे, शैतानों और चुड़ैलों का आतंक जैला था।

सर्दियों के दिन चल रहे थे। मेरे दोस्त नरेन के माता पिता किसी काम से दूसरे शहर जाने वाले थे। फौरन मैने और नरेन ने मस्त मस्त फिल्मों की डीवीडी इककठी कर ली और रात भर पार्टी करने का प्लान बना डाला। नरेन के माता पिता के निकलते ही बाइक ले कर मै नरेन के घर पहोंच गया।

हमने उस रात खूब धींगा मस्ती की। म्यूजिक सुना, बाहर का खाना मँगवा कर खाया, चेस खेला, और फिर डीवीडी लगा कर फिल्में देखने बैठ गए। रात के तीन बजे तक एक्शन फिल्में देखि तो ऊब गए। नरेन ने कहा की चलो एक हॉरर फिल्म देखे।

“मै भी बोला की डरता कौन है… लगा दे… वैसे भी सारे भूत पलीतों का मै ही असली बाप हूँ… और सारी चुड़ैले मेरी गर्ल फ्रेंड हैं। इतना बोल कर मै हसने लगा… नरेन भी ठहाके लगा कर हसने लगा…”

हमनें उस रात सवा घंटे की “देसी ड्राकुला” फिल्म देखी … फिल्म इतनी भयानक थी की मै और नरेन फिल्म देखते देखते ही आठ से दस बार सु सु हो कर आए। करीब सवा चार और साढ़े चार के बीच फिल्म खत्म हुई। हम दोनों को नींद आने लगी थी। टीवी बंद कर के हम सोने लगे।

तभी अचानक घर की लाइट जल उठी… और टीवी भी चालू हो गया… और वह हॉरर फिल्म अपने आप टीवी में प्ले हो गयी… जब की हमने डीवीडी तो अलमारी में रख दी थी।

मै और नरेन कांपनें लगे और एक दूजे का हाथ पकड़ लिया… तभी अचानक घर का दरवाजा कोई पागलों की तरह पीटने लगा… और घर में गरम हवाएँ चलने लगी। मेरा तो दिल दहल गया… और नरेन तो बच्चों की तरह चिल्लाने लगा…

हम दोनों को लगा की पक्का… यह कोई… भूत प्रेत ही है… क्यूँ की अपने आप टीवी का चालू होना… डरावनी फिल्म बिना सीडी के चलने लगना और दरवाजा पीटना यह सब भूत या आत्मा ही कर सकती है।

डरते कांपते हम दोनों दरवाजे तक गए… और धीरे से दरवाजा मैने खोला… उस वक्त सुबह के साढ़े  चार बजे थे। और दरवाजा खोलते ही देखा तो हमारे हौश उड़ गए…

“घबराइये मत वहाँ भूत नहीं था, पर नरेन के माता पिता थे। ”

मुजे रात में वहाँ देख कर… नरेन के जल्लाद जेसे बाप ने नरेन को फावड़े जेसे दाए हाथ से चमाट लगा दी… नरेन की माँ भी किसी चुड़ैल से कम जालिम नहीं थी। उसने भी नरेन के कुछ बाल वहीं नौच डाले। और तीन चार छौटे छौटे थप्पड़ नरेन को जड़ दिये।

नरेन के पापा नें मुजे आंखे दिखाते हुए उसी वक्त घर से निकल जाने को कहा… मै भी उधर से चप्पल हाथ में लिए फुर्ती दिखा कर भाग निकला… बाइक स्टार्ट की… और घर की और चल पड़ा… रास्ते में घूप अंधेरा था… कुत्ते रो रहे थे। और अजीब डरावना माहौल था।

मेरे दिमाग में अभी भी उस “देसी ड्राकुला” फिल्म, और अचानक चालू हुए टीवी की बात और नरेन के ज़ालिम माँ बाप के खयाल चल रहे थे। तभी अचानक एक सफ़ेद साड़ी वाली खून से लथपत औरत और एक भयानक नुकीले दांतों वाले विकराल इन्सान ने मेरा रास्ता रोका… मै तो बाइक भगाने लगा… वह दोनों चिल्लाते हुए मेरे पीछे  भागे…

तभी एक खुले बालों वाली बुढ़िया ने मेरे बाइक के टायर में लकड़ी घुसा कर मुजे ओंधे मुह गिरा डाला… अब मेरे पास कुल तीन लोग थे… एक बूढ़ी डरावनी औरत जिसने मुजे गिराया… दूसरी सफ़ेद साड़ी वाली जवान औरत… और वह डरावना विकराल इन्सान… उन तीनों नें मुजे घेर लिया…

और उनके पीछे देखा तो मेरे हौश उड़ गए… क्यूँ की वहाँ और तीन डरावने इन्सान थे। अब मै छ: लोगों से घीरा हुआ था। कांपती आवाज मैनें उन लोगों से पूछा की कौन हो तुम लोग…?

उनहों ने मुजे सिर्फ इतना कहा की………

“तुम तो हमे अच्छी तरह जानते हो ना…. ? तुम्ही नें तो बोला था की डरता कौन है… और सारे भूत पलीतों के तुम ही असली बाप हो… और सारी चुड़ैले तुम्हारी गर्ल फ्रेंड है….. अब आ गए हम सब… चलो हमारे साथ चलो”

इतना बोल कर उन सब नें मुजे कंधे पर उठा लिया… और डरावनी आवाजों मै रोते चिल्लाते मुजे कहीं ले जाने लगे। मै पगले बैताल की तरह चिल्ला रहा था पर वहाँ मेरी सुने कौन…. अचानक मुजे याद आया की “हनुमान चालीसा” बोलने से भूत पलित क्या उसके बाप भी नहीं रुकते… मैने फौरन “हनुमान चालीसा” बोलना शुरू किया…

मेरे हनुमान चलिशा शुरू करते ही उन सब को जेसे आग लगी हो वैसे… वह सब मुजे फेंक कर भागे…. और डरता कांपता मैं अपनी बाइक ले कर अपने घर पहुंचा। इतने में सुबह के सात बज चुके थे। और उजाला हो चुका था। तभी नरेन गालियाँ बकता हुआ मेरे घर आया…

नरेन: क्या रे फटटू… डर कर रात में अपने घर क्यूँ भाग आया…?

में: अबे तेरे पापा मम्मी आए और उसी ने तो मुजे भगाया… और दरवाजे पर तुजे उनहों ने पीटा भी तो था… भूल गया क्या…

नरेन: सुबह सुबह भांग खाई है क्या? मेरे माता पिता कब आए? वह तो इस वक्त दूसरे स्टेट में है। हॉरर फिल्म देखने के बाद तो हम सो गए थे। और जब सुबह अलार्म बजा तो मैने उठ कर देखा की तू भाग चुका है मेरे घर से।

“अब मुजे सारी बात समज आ गयी थी। उस रात मैने जो भूत पलित और चुड़ैलों को ले कर जो मज़ाक किया था उसकी का बदला मुजे उन अंजान शक्तियों नें दिया था। वह तो भला हो हनुमान जी का जो मेरी जान बच गयी”

हकीकत में नरेन के माता पिता दो दिन बाद ही आए और नरेन और मैं उन्हे लेने एयरपोर्ट भी गए थे।

loading...

2 Comments

  1. azhar August 31, 2017
  2. Sanket Patel November 16, 2017

Leave a Reply