ट्रेन का खौफनाक सफर  Train ka Bhoot Story in Hindi

Train ka Bhoot Story in Hindiमेरा नाम सुनील वैद है। और मै वाराणसी का रहने वाला हूँ। मेरे पिताजी शिवजी के मंदिर में पुजारी है। Train  में सफर करते वक्त मेरा सामना रहस्यमय खौफनाक भुतिया शक्तियों से हुआ था। उस दिन के बाद मै कभी ट्रेन में बैठने की हिम्मत नहीं कर पाया हूँ। Train का साइरन बजे तो भी मेरी धड़कन बढ़ जाती है।मेरे साथ वह दर्दनाक घटना तब घटी थी जब मै अपने दोस्त बकुल और प्रदीप के साथ शिमला घूमने जा रहा था। हमने अचानक घूमने का Plan बना डाला तत्काल में ट्रेन टिकट बूक किया, और फटा फट रेल्वे स्टेशन पहुंचे।

ट्रेन निकलने का समय हो चला था। बकुल और प्रदीप ट्रेन में चड़ गए। और में नाश्ता पैक करवाने के चक्कर में लेट हो गया। मुजे ज़ोरों की बाथरूम लगी थी तो में उधर रेल्वे स्टेशन के पास कोने में खड़े खड़े पिशाब करने लगा। अचानक मुजे किसी अनजान शक्ति नें ज़ोर का थप्पड़ मारा… मेरे कान में तो जैसे सिटी बज गयी। मेरा नाश्ते का पैकेट हवा में उछल कर बिखर गया॥

आस पास देखा तो कोई ना था। पर मै जिस पत्थर पर पिशाब कर रहा था उस पत्थर से धुंवा निकाल रहा था। यह देख कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए। मै फौरन ट्रेन की और भागा, और चलती ट्रेन बड़ी मुश्किल से पकड़ी। बकुल और प्रदीप मुजे देखते ही गलिया देने लगे… वह बोले की कहा मर गया था… ट्रेन मिस हो जाती तो…?

अब मै उन दोनों को कैसे बताऊँ की मैं किस मुसीबत का तमाचा खा कर आ रहा हूँ। ट्रेन नें रफ्तार पकड़ ली और हम तीनों दोस्त भी मस्ती मै मस्त हो गए। बकुल और प्रदीप से मेंने तमाचा खाने की और पत्थर से धुंवा  निकलने की बात बताई पर वह दोनों तो मुज पर हसने लगे।

रात हो गयी थी हमने ट्रेन में ही खाना ऑर्डर किया। और फिर कुछ ही देर में हम ट्रेन में बाते करते करते सो गए। बकुल और प्रदीप की Upper Berth थी और में नीचे खिड़की के पास सोया था। तकरीबन रात तीन बजे ट्रेन किसी वीरान जगह पर रुक गयी। मेरी आँख खुली तो खिड़की से मेंने जांका तो देखा की बाहर जाड़ियों के पास बकुल खड़ा है और उसे किसी विकराल डरावने आदमी ने गले से पकड़ रखा है।

मेरे तो होंश उड़ गए। में फौरन प्रदीप को जगाने लगा तो देखा की प्रदीप भी अपने बर्थ सीट से गायब है। मैंने फिर से खिड़की में जांका तो देखा की प्रदीप को भी उसी बकुल के पास किसी चुड़ैल जैसी डरावनी औरत नें जमीन पर गिरा रखा है और उसने प्रदीप की छाती पर पैर रखा हुआ है।

मै अपने दोस्तों की मदद करने के लिए फौरन भागता हुआ ट्रेन के नीचे उतारा… और तभी अचानक देखा तो बकुल और प्रदीप गायब हो गए। और वह दोनों विकराल व्यक्ति भाग कर मेरे पास आ गए। अब उस चुड़ैल जेसी औरत और उस डरावने विकराल आदमी नें मुजे पकड़ रखा था। डर का आलम यह था की मेरी हलक सुख चुकी थी। और मेरे मुह से आवाज तक नहीं निकल रही थी।

वह चुड़ैल जैसी औरत बोली की हम दोनों रेल्वे स्टेशन से तेरा पीछा कर रहे हैं। हमारे रहने की जगह को तूने गंदा किया है, इस लिए अब हम तुजे अपने साथ ले जाएंगे और तेरे खून से वह जगह साफ करेंगे। इतना बोल कर वह दोनों मुजे जाड़ियों में खीचने लगे… में तो अधमरा हो गया था… फिर भी भागने की कौशीस कर रहा था। पर मुह से आवाज निकले तो कोई मेरी मदद को आएना। तभी अचानक ट्रेन का साइरन बजा। और वह दोनों रहस्यमय भुतिया लोग मेरा हाथ जटक कर भागे।

में बावलों की तरह ट्रेन की और भागा। और ट्रेन में घुस गया। फिर से ट्रेन चलने लगी। में चुप छाप अपनी सीट पर जा कर सो गया। मेरी धड़कने काफी तेज थी। फिर भी मेंने डरते डरते खिड़की से जांक ही लिया। तभी देखा तो वह विकराल आदमी और चुड़ैल की जोड़ी सामने जड़ियों में ट्रेन के साथ दौड़ रहे हैं। और उन दोनों के मुह मेरी और हैं। अब मैं खौफ से आतंकित था। में दहाडें मार कर रोने लगा। और चीखने लगा।

हमारे डिब्बे के सारे मुसाफिर जाग गए। और तभी देखा तो बकुल और प्रदीप दोनों कमीने दोस्त अपनी सीट पर से नीचे उतरते हैं। वह बोले की हम तो उठे ही नहीं है। अपनी सीट पर ही सोये हुए थे। जब की मेंने उन दोनों को ट्रेन में ना पा कर ही उन दोनों को बचाने के किए ट्रेन से नीचे उतरने का जोखिम लिया था।

सब ने मुजे शांत कराया और मेरे दोनों दोस्त फिर पूरी रात जागते हुए मेरे पास ही बैठे रहे। हम तीनों दोस्त शिमला घूमे पर ट्रेन के दर्दनाक हातसे की याद मुजे पागल किए जा रही थी। घर वापसी हमने बस में की। घर आने के बाद भी वह भुतिया जोड़ी मुजे डराती रहती थी। एक दिन मेंने अपने पिता से मदद मांगी।

“पिताजी फौरन मुजे उस जगह पर ले गए जहाँ पर मेंने पिशाब किया था। उन्होने पानी की बाल्टी और जाडू मँगवा कर वह जगह खुद पानी से साफ कर दी। और वहाँ हाथ जौड कर बोले की मेरे बेटे ने अनजाने में जो गलती की है उसके लिए मै आप से माफी मांगता हूँ, और आप लोगों की मुक्ति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ।“

उसके बाद हम घर चले गए। आज उस बात को एक साल हो चुका है। वो जगह साफ कर आने के बाद कभी वह भुतिया लोग नज़र नहीं आए। मेरी मदद करने के लिए मै अपने पापा का शुक्रगुज़ार हूँ “लव यू पापा”

2 Comments

  1. Ayush Sharma August 7, 2017
  2. avi kashyap December 18, 2017

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