नाविक का भूत , जिसने पहुचाया नदी पार The Sailor Ghost Who Helped Me

मित्रो मेरा नाम राजन रविन्द्रन है और मै केरल का रहने वाला हु | आज मै आपको मेरे दादाजी के साथ घटी सच्ची घटना से आपको रूबरू करवाना चाहता हु | यह बात आज से 40 साल पुरानी है मेरे दादाजी एक अध्यापक थे और वो रोजाना नाव में बैठकर नदी के दुसरी तरफ दुसरे गाँव में पढ़ाने जाया करते थे | मित्रो जैसा कि आपको पता होगा कि उस समय केरल इतना विकसित प्रदेश नहीं था और आवागमन के लिए अधिकतर नावो का उपयोग किया जाता था |The Sailor Ghost

एक दिन की बात है स्कूल में परीक्षाये चल रही थी | मेरे दादाजी इस वजह से स्कूल में काफी लेट हो गये थे | सर्दी का समय था और शाम की सात बज चुकी थी | जैसा कि आप जानते है कि सर्दियों में अँधेरा जल्दी हो जाता है | शाम के सात बजे भी ऐसा लग रहा था कि जैसे रात के 10 बज गये हो | स्कूल के सभी स्टूडेंट और अध्यापक छ: बजे तक निकल चुके थे | अब मेरे दादाजी और स्कूल का चपरासी दोनों ही रह गये थे | चपरासी उसी गाँव का रहने वाला था लेकिन मेरे दादाजी को तो नदी के उस पार आना था |

मेरे दादाजी धीरे धीरे नदी के किनारे तक पहुचे तो उनको वहा पर कोई भी नाव नहीं दिखी | उन्होंने सोचा आज तो यहा पर फंस गये | उन्होंने सोचा कि कुछ देर इंतजार करते है शायद कोई नाव आ जाए | तभी उनकी नजर नदी में दूर से एक रोशनी नजर आयी | मेरे दादाजी ने सोचा शायद यही नाव है | मेरे दादाजी की जान में जान आयी | वो नाव धीरे धीरे करीब आती जा रही थी तभी वो किनारे में आकर रुक गयी |

उस नौका के चालक ने अपना पूरा मुह ढक रखा था | मेरे दादाजी ने उसको नदी के उस पार ले जाने के कहा और उसने बिना कुछ बोले अपना सिर हिला दिया | मेरे दादाजी ने सोचा शायद बेचारा ठण्ड के मारे कुछ नहीं बोल पा रहा है | अब वो धीरे धीरे अपनी नाव नदी के उस पार ले जाने लगा | मेरे दादाजी ने कई बार उससे बतियाने की कोशिश की लेकिन वो कुछ नहीं बोला |

अब मेरे दादाजी की नाव मेरे गाँव के तट पर पहुच चुकी थी और मेरे दादाजी नाव से उतर गये और जैसे ही पैसे निकालकर उसको देने लगे तो वहा पर नाव में कोई नहीं था | मेरे दादाजी के होश उड़ गये कि वो नौकाचालक अचानक कहा गायब हो गया कही वो भूत तो नही था  | मेरे दादाजी डरते डरते घर पहुचे और घर जाकर सो गये |

अगले दिन मेरे दादाजी ने अपने दोस्तों से नाव के भूत का जिक्र अपने दोस्तों से किया तो दोस्तों ने बताया कि इस नदी में कई सालो पहले एक नाविक की यात्रियों के साथ मौत हो गयी थी और वो अपने यात्रियों को गंतव्य स्थान पर नहीं पंहुचा पाया | इसी कारण उस नाविक की आत्मा कई बार रात को फंसे हुए यात्रियों को गन्तव्य तक पहुचाकर पश्चाताप करती है | हालांकि वो किसी को नुकसान नहीं पहुचाती है | अब मेरे दादाजी समझ गये तो कि उस नाविक के भूत ने उनकी मदद की थी | मेरे दादाजी आज भी उस नाविक के भूत के किस्से को हम लोगो को सुनाते है |

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2 Comments

  1. hindifox.com April 29, 2016
  2. Vimal Suthar February 19, 2017

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