प्रेत विद्या ने किया मेरा जीवन बर्बाद | Pret Vidhya Ne Kiya Mera Jeevan Barbad

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Pret Vidhya Ne Kiya Mera Jeevan Barbadमेरा नाम रमेश त्यागी है। बचपन से ही मै शर्मिला और खुद में खोया रहने वाला लड़का रहा हूँ। अपने शर्मीले स्वभाव की वजह से कभी मेरे ज़्यादा दोस्त नहीं बने। अकेलेपन से मुजे प्यार हो चला था। पर मेरी येही आदत मुजे इतनी भारी पड़ जाएगी यह तो मैने सपने में भी नहीं सोचा था।बारहवी कक्षा का मध्यांतर था। और छुट्टियाँ चल रही थी। अकेले अकेले बोर होने की वजह से मैंने टाइम पास के लिए मैलीविद्या की किताबें पढ़ना शुरू कर दिया।

उन किताबों में बहुत सारे मंत्र लिखे थे। वशीकरण करना, किसी को भुखार चढ़ाना, उल्टियाँ कराना, लोगों के बीछ जगड़े लगवाना। ऐसे कई टोटके करने के मंत्र उन बुक्स में बताए गए थे। पहले तो मुजे विश्वास नहीं था की ऐसा हो सकता है। पर मैंने खुद एकाद दो मंत्रों का खुद पर ही प्रयोग किया। तब मुजे एहसास हुआ की यह तो वाकय में असरदार है।मै दिन में आठ आठ घंटों तक भूत प्रेत, पिशाच, डायन और काली विद्या, मैली विद्या से जुड़ी किताबें पढ़ने लगा। दो महीने की छुट्टीय मेंने इसी काम में बिता दी। और मेरा स्कूल का थर्ड सेमेस्टर शुरू हो गया। स्कूल में घुसते ही मेंने अपने सहपाठीयों पर मेली विद्या आज़माना शुरू कर दिया।

जो टीचर डांटे वह गया। एक दिन तक उसका माथा में दुखा देता। कई दोस्तों पर गुस्सा आने पर मैने उन्हे क्लास में ही खून की उल्टियाँ करवा दी थी। दोस्तों को तो छोड़ो मैने अपने पापा पर भी एक जादू टोना किया था, जिस के प्रभाव से वह मुजे कभी पैसे देने से मना कर ही नहीं पाते थे। मैने घौर साधना करने वाले तांत्रिकों से संपर्क किया। उन लोगों को अपनी मंत्र तंत्र वाली शक्तियाँ दिखाई। उन्होने कहा की में अगर भूत प्रेत की साधना करूँ तो और भी शक्तियाँ पा सकता हूँ। मै फौरन तयार हो गया उन लोगोने मुजे भूत साधक मंत्र दिये।

साधना शुरू करने के तीसरे ही दिन मेरे घर में भयानक आतमाए घूमने लगी। और मेरे मंत्रों पर जैसे गुलामों की तरह नाचने लगी। मैने एक दिन अपने पड़ोस में रहने वाली लड़की को मैली विद्या से, प्रेत से टकरा दिया। क्यूँ की वह लड़की मुजे भाव नहीं देती थी। मेरी यह नादानी मुजे बहुत भारी पड़ गयी। क्यूँ की वह प्रेत मेरे बुलाने से वापिस नहीं लौटा। उसने उस लड़की के शरीर में वास कर लिया। मै यह तो नहीं चाहता था। मै तो सिर्फ उसे सबक सीखाना चाहता था। पर अब मामला गंभीर हो चला था। वह प्रेत उस लड़की का खून चूसने लगा था। वह पूरी पागल सी होने लगी थी। रात रात भर वह चिल्लाती रहती थी। रोती रहती थी। उसकी भयानक चीखे अब मेरा दिल दहलाने लगी थी।

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मुजे खुद से घीन आने लगी थी। समज नहीं आ रहा था। की क्या करू, किस से मदद मांगु की उस बेचारी लड़की की हालत ठीक हो सके। फिर मुजे खयाल आया की उन अघोरियों के पास जाता हूँ, शायद वहाँ से कुछ रास्ता निकल आए।उन अघोरियों ने जो कहा वह सुन कर मेरी साँसे अटक गयी। और मेरे हाथ पाँव काँपने लगे। उन्होने कहा की ज़रूर इसका इलाज़ हो सकता है, पर अब वह प्रेत उस लड़की का खून और मांस चख चुका है। वह प्रेत अब छाया नहीं रहा। उसे वहाँ से निकाल कर किसी और के शरीर में जगह देनी होगी।

और वह कोई, या तो तुम हो सकते हो, या फिर तुम्हारे घर का कोई व्यक्ति। क्यूँ की प्रेत जिद्दी होते हैं, वह अपना मनपसंद शरीर तभी छोड़ते है। जब उसे भेजने वाला, या उसका कोई सगा, अपने शरीर में उसे जगह दे। और उस अघोरी ने यह भी कहा की प्रेत के चंगुल में वह लड़की कुछ ही दिन जी पाएगी, और मरते ही वह भी प्रेत ही बनेगी। और तुम्हारे शरीर में रहने और तुम्हारा मांस खाने, और खून पीने का उसे पूरा अधिकार होगा। क्यूँ की तुमने उस पर प्रेत छोड़ा था।

अपने पाप मुजे अब इस कदर डरा रहे थे की मै पागल सा होने लगा था। मैंने फैसला किया की उस प्रेत को मै अपने ऊपर लूँगा। इस काम में उन अघोरियों ने मेरी मदद की। वही लोग उस लड़की के घर गए और उस बेकसूर लड़की को उस प्रेत से आजाद कराया। अब सजा भुगतने की मेरी बारी है। आज में फिर अकेला हूँ कभी कभी बीमार भी रहता हूँ। पढ़ाई छोड़ दी है। खुद से नफरत हो चली ह।

वह प्रेत मेरे अंदर रह रहा है, इस बात से मुजे डर तो लगता है। पता नहीं कब वह अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देगा। उन अघोरियों ने कहा है की, इस वक्त मेरा मनोबल मजबूत है इसी लिए प्रेत प्रभाव नहीं दिखा पा रहा है। पर वह मेरा मांस खा कर और खून पी कर धीरे धीरे प्रबल होगा। और फिर मेरे कमजोर पड़ने पर वह त्रांडाव मचाना शुरू करेगा।

मैने उन अघोरियों से पूछा था की इस प्रेत को मुजसे दूर करने का और कोई उपाय नहीं?  यानि की उसे किसी और इन्सान पर छोड़े बिना दूर करना मुमकिन नहीं होगा? तब उन अघोरियों ने कहा की….

“बेटा यह तो तेरे कर्मों की सजा है। जब तक तेरे पापों की भरपाई नहीं होगी, तब तक तुजे इस बला से छुटकारा नहीं मिलेगा। हा अगर तू और गहरे पापों के दलदल में उतरना चाहता है, तो अपने किसी परिवार सदस्य को चुन ले जिस पर तू इस भयानक प्रेत को छोड़ सके।“   

मैने निश्चय कर लिया है, की अब अच्छाई के रास्ते पर चलूँगा, और खुद ही अपने पापों की सजा भुगतूंगा। चाहे फिर क्यूँ ना मेरी जान चली जाए। मित्रों मेरे लिए दुआ करना। – “रमेश त्यागी”

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18 Comments

  1. ajay March 25, 2017
  2. rohit May 27, 2017
  3. Gajanan pawar June 24, 2017
  4. nidhi June 29, 2017
  5. Ashim patra August 2, 2017
  6. Mradul Pandit September 4, 2017
  7. Mradul Pandit September 4, 2017
  8. Manish soni September 10, 2017
    • nidhi September 19, 2017
      • Sanjay Gupta September 29, 2017
      • Sanjay September 29, 2017
  9. Manish soni September 21, 2017
    • nidhi September 23, 2017
  10. Sanjay Gupta September 29, 2017
  11. souravbhadana October 5, 2017
  12. souravbhadana October 5, 2017
  13. souravbhadana October 5, 2017
  14. Partha October 5, 2017

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