प्रेत ने लिया पड़ौसन का रूप Pret ne Liya Padosan ka Rup

Pret ne Liya Padosan ka Rupमेरा नाम जग्गू परमार है। मै 45 साल का हूँ। चौपाटी के पास टुरिस्ट पैलेस के पीछे ही हमारा छोटासा घर है। जहां पर मै घर जमाई हूँ। जैसे बंदर कितना भी बूढ़ा हो जाए पर गुलाटी मारना नहीं भूलता वैसे ही आधेड़ उम्र मै भी मै पूरा रंगीन मिजाज इन्सान हूँ। और अपनी रोमियोपंथी के कारण कई बार मेरी बीवी ने मेरी धुलाई भी की है। पर सरकारी नौकरी होने के कारण वह मेरे साथ टिकी हुई है, वरना मेरी करतूतों के कारण वह मुझे कब की छौड़ चुकी होती।

15 साल की शादीशुधा लाइफ में कई बार मेरी बीवी ने मुझे दूसरी औरतों के साथ पकड़ा है, और मेरी बेवफाईयों  के लिए उसने मुजे ऐसी ऐसी जगह पर घुसे और लातें मार कर सजा दी है, की यहा बताना मुश्किल है, बस आप समज जाओ। मेरी ज़िदगी तब ज़हर बन गयी, जब एक प्रेत ने मुझे अपने शिकेंजे मै लिया। आज भी मै उस घटना को याद कर के सिर से पैर तक कांप जाता हूँ। मेरा ब्लड प्रेसर बढ़ जाता है।

उस दिन मेरी काम से छुट्टी थी। मेरी बीवी एक टीचर है, वह नौकरी पर गयी थी। मै लूँगी पहन कर बाल्कनी में खड़ा था। तभी मैने देखा सामने बंध पड़ा मकान खुल चुका था, शायद कोई नया किरायेदार रहने आया था। मै उधर जांकने लगा। तभी थोड़ी देर मै एक सुंदर लंबे बालों वाली हरी भरी औरत उस मकान की बालकनी मै आई। मैने तुरंत सिर हिला कर उन्हे स्माइल दी। वह मुह फिरा कर उसके घर के अंदर चली गयी। शायद मेरे अंदर छुपे भूखे मवाली भेड़िये को वह फौरन पहचान गयी होगी।

मै कहा रुकने वाला था। मैने फौरन गंजी पहनी और उसके घर मुलाक़ात करने चला गया। वह लोग घर का समान खोल रहे थे। उसके पती को तुरंत दोस्त बना लिया और मदद करने लगा। दूसरे ही दिन उसका पती काम के सिलसिले में शहर चला गया। मैने मौका पा कर उसकी सुंदर बीवी से दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया।

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वह उसकी बालकनी में और मै अपनी बालकनी मै। नैन मटटके से बात शुरू हुई और एक दिन उसने इशारा कर के मुजे बुला ही लिया। मै भी सेंट लगा कर भागता कूदता उसके घर मै घुस ही गया। अंदर जाते ही उसने दरवाजे और खिड़कियाँ बंद कर ली। मै तो समजा की आज तो जैकपोट लग गया।

पर मेरी गलत फैमि तब दूर हो गयी जब उसने कहा की नाच कर दिखा… मैने कहा की अरे नाचने का समय नहीं है मेरे घर मेरी बीवी आ जाएगी।…

उसने ऊंची आवाज में फिर से कहा… नाच॥ और अब वह मुझे गुस्से में घूरने लगी… मैने उसे कहा की पागल तो नहीं हो ना ? वह बोली… अगर तू नहीं नाचा तो में शौर मचा कर पूरा मोहल्ला यहाँ बुला लूँगी…

अब मै थोड़ा थोड़ा डरने लगा था। क्यूँ की वह मुझे पूरी पागल लग रही थी। मैने उधर ही नाचना शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद वह एक चाबुक लायी। और मुजे बोली की कपड़े उतार कुत्ते…

मै तो अपनी चप्पल हाथ मै ले कर भागने लगा… पर वह खूबसूरत गजगामिनी औरत के रूप मै छुपा प्रेत अपने असल रूप मै आ गया। और दरवाजे के आगे खड़ा हो गया। उसका विकराल रूप आज भी मेरा दिल दहला जाता है। वह एक पठान का प्रेत था। उस पठान के प्रेत का आधा मुह जला हुआ था। और एक आँख गायब थी। भेड़िये जैसे उसके दाँत थे। और उसके मुह से बे-हौश कर देने वाली दुर्गंध आ रही थी।

खूबसूरत पड़ौसन के अंदर छुपे पठानी प्रेत ने मेरे साथ वह सब किया जो एक शौकीन पठान करता है। तीन घंटे अपनी कैद मै रखने के बाद उसने मुजकों दरवाजा खोल कर चले जाने को कहा। और साथ मै यह भी कहा की मै फिर तुम्हें बुलाऊंगा और अगर तुम नहीं आए तो मै तुम्हारे घर में चला आऊँगा।

जाना था जापान पाहोंच गए चीन। जाते हुए मेरी तो चाल बदल गयी थी। और अपनी पड़ौसन का दरवाजा खोल कर कराह ते हुए, मै अपने घर की और जाने लगा तो देखता हूँ, की सामने से मेरी पड़ौसन हाथ मै सब्जी का थैला लिए चली आ रही है।

यानी की इसका मतलब यह हुआ की उस भूखे पठानी प्रेत ने ही पड़ौसन का रूप ले कर, मुझ पर डौरे डाले, और मुजे उस घर में बुलाया, फिर मेरी बैंड बाजा डाली। मेरे लिए यह किस्सा डरावना था। पर मेरी बीवी को जब मैने यह किस्सा बताया तो वह तो खुश हुई, उसने कहा की तुम्हारे पापों की येही सजा है… जो हुआ अच्छा हुआ…

 

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