नूर मंज़िल का रोंगटे खड़े कर देने वाला किस्सा | Nur Haveli Haunted House Story in Hindi

मेरा नाम लतिका करीम है | मेरे अब्बू बेकरी चलाते हैं | कुछ ही दिनों में मेरी शादी होने वाली थी | लेकिन तभी अचानक हमारे घर पर एक बड़ी मुसीबत आन पड़ी | दरअसल हमारा घर गैर-मालिकाना जगह पर बना हुआ था तो, म्युन्सिपल कोर्पोरेशन की और से जगह छोड़ने का नोटिस आ गया | अब्बू नें मेरे मामू से मदद मांगी तो उन्होंने, हमारे रहने का इंतज़ाम नूर मंज़िल में करा दिया | अब हम नूर मंज़िल में पनाह तो ले लिए, लेकिन हमें उस जगह पर बड़ा भयानक एहसास हो रहा था | जैसे कोई दर्रिंदा किसी जिंदा इन्सान को नोच रहा हो, जैसे कोई मासूम रो रो कर किसी से दया–रहेम की भीख मांग रहा हो |

हमनें यह बात अब्बू से कही तो हमें जम कर डांट पड़ी | उस समय हमारे घर के हालात इतने खस्ता हो चुके थे की, दिन रात मेरा पूरा परिवार उसी सोच में डूबा रहता था की, नूर मंज़िल से जाना पड़ा तो फिर कहाँ जायेंगे | ना कोई बचत थी ना कोई ज़मीन थी | जिसे अपना घर समझा था वह बस अब इतिहास बन चूका था | उस रात बहुत बारिश हुई | बारिश थमी तो बीजली चली गई | हम नें सोचा घर की छत पर जा कर खुली हवा में सांस लेते हैं |

अम्मी अब्बू तो ऊपर साथ आने से रहे | मेरा छोटा भाई करीम और मैं छत पर जा कर बैठे | ऊपर काफी अंधेरा था | अचानक करीम मुझ से गुस्सा हो गया | मैंने उसकी नाराज़गी का कारण पुछा तो वह मुझे ज़ोर से धक्का दे कर निचे भाग गया | उसकी ऐसी गुस्ताख हरकत से मैं चौंक गयी | मेरा छोटा भाई कभी ऐसी हरकत नहीं करता था | अब में ऊपर वहां अकेली थी | तभी अचानक मेरे कान के पास सरसराहट महसूस हुई | किसी के बेहद पास होने का एहसास हुआ |

मैं आज भी उस मनहूस एहसास और तेज़ बदबूदार गंध को भूली नहीं हूँ | मैं फ़ौरन निचे चली जाना चाहती थी | लेकिन पीछे मुड़ कर देखने की हिम्मत नहीं हो रही थी | एक पल के लिए मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे कोई झुला जुला रहा हो, मेरी पीठ से हलके हलके धक्के महसूस होने लगे | उस खौफ़नाक एहसास से मेरी रूह तिलमिला उठी | मैं तुरंत जान लगा कर चीख पड़ी | कुछ ही देर में मेरे अब्बू और अम्मी वहां आ पहुंचे |अब मेरी समझ में आ चूका था की करीम के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ होगा | मेरा भाई इतना खौफ में था की वह तो मुझसे नज़रें भी नहीं मिला रहा था | जैसे तैसे कर के हम सब सोने चले गए | कपड़े बदलने पर मैंने देखा मेरी पीठ पर गहरे घाव के निशान थे | मैंने यह बात किसी से नहीं कही |

अब डर के मारे मैं सो भी नहीं पा रही थी | चद्दर सिर पर लगा कर उसी डरावने मंज़र के बारे में सोचे जा रही थी | तभी अचानक मुझे वही गंध महसूस हुई | मैंने जटके से चद्दर हटा दी तो मेरा दिल दहेल गया | मेरे बेड के आसपास छोटे छोटे बच्चे दिखने लगे | उन सब के चेहरे पर सूखे हुए खून के धब्बे और मार के काले निशान दिख रहे थे | बच्चे कभी मेरी और देखते तो कभी खिड़की की और इशारा करते | एक पल के लिए मेरे डर नें उत्सुकता का रूप ले लिया |

मैं उस वक्त कुछ भी बोलने की हालत में नहीं थी | मैं बस रोते हुए, इशारे से पूछे जा रही थी, की वह सब मेरे पास क्यूँ आये हैं | कुछ देर यही खौफ़नाक मंज़र बना रहा | मेरी रोने की आवाज़ सुन कर मेरी अम्मी जाग गयी | उसने मेरे कंधे झंजोड़ कर मुझे उस अवस्था से बाहर कीया | अम्मी नें मेरी बात इस बार, गौर से सुनी | उनको पता था की उनकी बच्ची, फ़िज़ूल में कभी ऐसा नाटक नहीं करेगी |अगले ही दिन अब्बा घर का सोना-गहने गिरवी रख कर पैसा उठा लाए | हमने तुरंत मामू को बुला कर नूर मंज़िल की चाबी वापिस कर दी | अब हम किराए के मकान में रहते हैं | कुछ ही दिनों में घर का लोन मिलने वाला है | मकान नया बन जाएगा लेकिन नूर मंज़िल की खौफ़नाक याद सदा के लिए मेरे ज़हेन में रहेगी |

वैसे नूर मंज़िल के बारे में उड़ती उड़ती खबर मिली है की वहां पर एक यतीमखाना हुआ करता था, और वहां रहने वाले बच्चों के साथ उन्हीं के रखवाले नें बहुत ज़ुल्म किए थे | इसी लिए उन सब की आत्माएं वहां सालों से भटक रही हैं | – खैर अब मकान मामू का है – मैं बिलकुल नहीं चाहती की उनके मकान की बदनामी हो – लेकिन अगर यह सब सच है तो, बस दिल से दुआ है की उन मासूम बच्चों की रूह को जन्नत नसीब हो जाए और उस दरिंदे को सदा के लिए दौज़ख मिले |

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