शून्यता-हादसों का कारण Neutralism Cause of Accidents

आप सभी पाठकों इस मंच पर फिर से स्वागत है दोस्तों आज मैं आपके सामने एक अलग तरीके का किस्सा  Neutralism Cause of Accidents लाया हूँ जिसको मैंने भी महसूस किया है, मित्रों ये किस्सा डर और हादसों को मिलाकर ही है पर इस किस्से मैं डर है भी और नहीं भी …..
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आपने आजादी के समय से लेकर 80 ,90 के दशकों मे जो मकान बना करते थे वो काफी मजबूत और टिकाऊ होते थे,और उनकी बनावट भी थोड़ी रजवाड़ो के जैसी ही हुआ करती थी मैं आपको उसी समय के मकानो मैं ले जाने कोशिश रहा हूँ इसे आप महसूस करेंगे तो स्वयं ही समझ जाएंगे,कि मैं आपसे कैसे मकानो को बताने की कोशिश कर रहा हूँ,, मित्रों हमारे बड़े बुजुर्गो द्वारा हमें जो विरासत मैं मिलता है, खासकर पुराने मकान, वैसे ही एक 5 मंज़िला इमारत मे एक परिवार कि कई पीढ़िया रहती आई थी, ये इमारत हमारे संबंधियों मैं ही किसी कि है जिसमे उनका कुटुंब परिवार रहता आया था, हालांकि दोस्तों इस किस्से मे कहीं-2 आपको ऐसा लगेगा कि ये इसके उत्तर तो हमे विज्ञान भी बता सकता है,, लेकिन कहीं-2 हमें ऐसा भी लगेगा कि नहीं कुछ तो अलग है इस किस्से मे जो हमे सोचने पर मजबूर कर देगा

 

मित्रों ये किस्सा उस 5 मंज़िला इमारत का है जो अक्सर हादसों को जन्म देता है,परिवार के कई सदस्य इसके शिकार भी हुए और कई बच भी गए,, अब किस्से कि और चलते है, इस 5 मंज़िला इमारत मैं करीब-2 (7) सीडियाँ उतरने के बाद एक चौड़ा पत्थर आता है फिर अगली सीडियाँ शुरू हो जाती है ऐसा करीब 6,7 बार उतरने के बाद हम नीचे उतर पाते है, यही सिलसिला चढ़ने पर भी करना होता,, इस 5 मंज़िला इमारत मैं सभी भाइयो का बंटवारा हो चुका था और सब मज़े से भी रहते थे, इस 5 मंज़िला इमारत मैं एक ऐसी सीढ़ी भी आती है जहां पर पहुँचने के बाद बिलकुल अंधेरा हो जाता है और दिमाग काम करना बंद का देता है, यहाँ मैं आपको एक बात जरूरी तौर पर बताना चाहता हूँ ना ही यहाँ सांस लेने कोई तकलीफ होती है और ना हमारा मानसिक संतुलन किसी भी प्रकार से प्रभावित होता है,

 

हम सभी चीज़े सोच सकते है,विचार कर सकते है, कुल मिलकर हम यहाँ पर पूरी तरह से अपनी चेतन अवस्था मे ही रहते है,पर बात ये है वहाँ पहुँचते ही ऐसा लगता है जैसे हम यहाँ 7,8 कदमो तक टहल सकते है जबकि पत्थर की चौड़ाई आप जानते ही है कि कितनी होती है, और कभी-2 वहाँ ऐसा महसूस होता है जैसे कि हम कहीं फंस गए हो ,ना तो आगे जाने का रास्ता मिलता है ना ही पीछे जाने का, मेरे अनुभव मैं तो मेरे साथ ऐसा भी हुआ कि आगे चलकर हाथ लगाऊ तो दीवार महसूस होती है और पीछे जाने पर भी दीवार महसूस होती है, ऐसा लगता है जैसे जिंदा दीवार मैं चुनवा दिया गया हो|

 

दूसरों के अनुभवो के आधार पर भी कितनी ही बाते सामने आई एक के कहने के अनुसार उस जगह पहुँचते ही दिमाग काम करना बंद कर देता है, और कुछ समझ नहीं आता कि क्या करे, किसी-2 सदस्य ने तो ये भी कहा वहाँ पहुँचते ही पता नहीं किसी ने पीछे से उसको धक्का दिया, और उसका सिर दीवार से टकरा गया जबकि आगे तो सिर्फ सीडियाँ ही हो सकती है ये तो सभी जानते है, उस सदस्य को धक्के के कारण हाथ मैं फ्रेक्चर भी हो गयाथा,एक महिला सदस्य के अनुभव पर अगर गौर करे तो उसने भी यही सब बातें महसूस करी,,और उसके साथ तो एक अलग ही बात हो गई|

 

शायद आप इस बात पर आप हंस पड़े, उस जगह पर जाते ही जब उसे कुछ नहीं सूझा वो नीचे बैठ गयी और सिर पर हाथ रख कर रोने लगी, और उसे ये समझ नहीं आ रहा था कि वो उस मंजिल के कौनसे हिस्से मैं है, फिर उसने निर्णय किया अब तो कोई या तो ऊपर से नीचे आएगा या फिर कोई नीचे से ऊपर आएगा तब ही वो वहाँ से निकल पाएगी, पर उस दिन उसकी किस्मत खराब थी पूरे दिन उसने उन्ही सीडियो मैं बीता दी जब काफी ढूंढने के बाद जब वो नहीं आई तो इस बात को कहने के लिए घरवालो ने ऊपर से नीचे,, नीचे से ऊपर सीडियों मैं आना- जाना शुरू किया तो उसको थोड़ी आस बंधी फिर कहीं जाकर वो वहाँ से निकाल पायी

 

तो दोस्तों ये किस्सा Neutralism Cause of Accidents हास्यादपद के साथ-2, डर, हादसों कि स्थिति भी पैदा करता है, पर अगर हम इस चीजों को गंभीरता से ले तो ये चीज़ किसी डरावने अनुभव से कम ना होगी

 

This Story is Posted by Vinaay Thada from Rajasthan

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