एक ऐसी रहस्यमयी झील ,जो पानी से नहीं ,नरकंकाल से है भरी Mysterious Roopkund Lake

Roopkund Lakeeमित्रो भारत के रहस्यमय सफर की इस कड़ी में हम आपको आज ऐसी जगह से रूबरू करवाएंगे जिसके रहस्य को दुनिया भर के वैज्ञानिक नहीं समझ पाए | आज हम आपको हिमालय की सुदूर घाटियों के स्थित रूपकुंड झील Mysterious Roopkund Lake के अनसुलझे रहस्य के बारे में आपको बतायेंगे |

Roopkund trekरूपकुंड झील , उत्तराखंड की हिमालय पहाडियों के बीच स्थित 5000 मीटर गहरी बर्फीली झील है जो कि सर्दियों में जम जाती है और गर्मियों में पिघल जाती है | इस झील तक केवल पर्वतारोही ही आते है | 1942 में यहा पर आये पर्वतारोहियों को 100 से भी ज्यादा नरकंकाल मिले तभी से ये जगह वैज्ञानिको के लिए रहस्य का सबब बना हुआ है | कैसे यहा आये नरकंकाल और किसके है ये नरकंकाल , इस रहस्य को सुलझाते वक्त यहा तीन अलग अलग तथ्य मिले है |

 

पहले तथ्य के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी सैनिक जब इस रास्ते से गुजर रहे थे तो घनी बर्फ होने की वजह से उन्हें रास्ता पता करने में बड़ी परेशानी हुई | कई दिनों तक घूमते घूमते हाय्पोथेर्मिया की वजह से इस झील वाली जगह इनकी मौत हो गयी |

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दूसरा तथ्य ये कहता है कि प्राचीन समय में जसधावल नामक राजा संतान प्राप्ति की खुशी में नंदा देवी दर्शन करने जा रहा था और रास्ते में अचानक ओलावृष्टी के कारण पूरा जत्था उस बर्फ की झील में दफन हो गया |तीसरा तथ्य ये कहता है कि 12 वी शताब्दी में यहा मुहम्मद तुगलक का आक्रमण हुआ था तो कुछ कहानिया जोरावर सिंह और उसके सैनिको पर आधारित है जो इस झील में तिब्बत के युद्ध के दौरान शहीद हो गए थे

 

किस तथ्य में कितनी सच्चाई है कोई नहीं जानता लेकिन आज भी उस झील में इन नरकंकालो को देखा जा सकता है | इतनी अधिक मात्रा में एक वीरान जगह पर नरकंकालो के मिलने से नेशनल जोग्राफिक की टीम भी यहा पर खोज करने आयी थी | आज भी इस जगह पर कई पर्वतारोही इस रहस्य को देखने आते है |

Skeleton Roopkund2013 में इंडिया टुडे अखबार में इस झील के रहस्य पर से पर्दाफाश किया और बताया कि वैज्ञानिको की खोज में 9वी शताब्दी में हुई भयंकर ओलावृष्टी में 200 से अधिक इन्सान यहा इस झील में दब गए |

 

अगर आप भी इस झील को देखना चाहते है तो अपने आप को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार कर लिजिये |

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