जूनागढ़ के जंगल की चुड़ैल का प्रकोप Junagadh Forest Chudail Story in Hindi

Junagadh Forest Chudail Story in Hindiमेरा नाम रमन है, और मै भावनगर में रहता हूँ, हमारा केबल का बिज़नस है। और आज में आप सब को उस किस्से के बारे में बताना चाहता हूँ, जिसमें मेरी जान जाते जाते बची थी। जूनागढ़ के गिर जंगल में हम तीन दोस्त जंगली जानवर देखने गए थे। वहाँ मुजे जानवर तो ज़्यादा नहीं दिखे पर नाखून से मांस नौचती चुड़ैल मिल गयी। यह मेरी खुशकिस्मती है, की आज में यह रियल स्टोरी शेर करने के लिए ज़िंदा हूँ। दो साल पहले की बात है…

मंजीत दोपहर ढाई बजे मेरे घर आया और उसने कहा की, चलो जूनागढ़ घूमने जाने का प्लान बना है। मैंने कहा की मेरा मन नहीं है। तुम लोग चले जाओ। पर मंजीत उन दोस्तों में से नहीं है जो आसानी से पीछा छौड़ दे। उसने मूझे दो घंटे बहेस कर के जूनागढ़ ट्रिप पर चलने के लिए माना ही लिया। जरूरी सामान ले कर हम तीनों ट्रेन में जूनागढ़ के लिए निकल पड़े। रूम ऑनलाइन ही बूक कर लिया था। तो वहाँ जा कर थोड़ी देर आराम कर के हम फौरन गिर जंगल की और निकल पड़े। मेरे साथ मंजीत, गोविंद और हमारा फॉरेस्ट गाइड था।

उस समय दोपहर के बारह बजे थे। तो हमने एक पैड के नीचे बैठ कर थोड़ा आराम करने का फैसला किया। तभी मेरी नज़र नदी पर गयी। वहाँ दूर एक हिरण पानी पी रहा था। मैंने देखा की उस हिरण का एक पैर नहीं था। उसके पास जाने का दिल किया। में अकेला ही नदी की और बढ्ने लगा। तभी अचानक उस हिरण ने पलट कर देखा। मुजे लगा अब यह डर कर भाग जाएगा। पर वह हिरण तो मेरी और आने लगा। और मुझसे तीन मिटर के फासले पर खड़ा हो कर मेरी और घूरने लगा।

मैंने उस से दूर जाने में ही अपनी भलाई समजी। पर जैसे ही मैने कदम पीछे हटाये उसने अपना रूप बदला। और हिरण से वह काली साड़ी वाली चुड़ैल बन गयी। मै अपने दोस्तों की और भागा, पर उसने लपक कर मेरे दोनों पैर पकड़ लिए, और मुजे गिरा दिया। और वह मेरे सिने पर बैठ गयी। में बावलों की तरह चीखेँ मारने लगा। मेरे दोनों दोस्त और हमारा टूर गाइड दौड़ कर मेरे पास आए, और पकड़ कर मुजे ज़मीन से उठा लिया। उन लोगों को पास आता देख वह चुड़ैल भाग कर दूर खड़ी हो गयी थी। मैने उन तीनों से कहा की वह सामने रही डरावनी काली साड़ी वाली चुड़ैल उसी ने मुझ पर हमला किया।

मंजीत गोविंद और हमारा टूर गाइड एक दूसरे की और देख ने लगे, और मेरे पर हसने लगे। चूँकि उन लोगों को वह भयानक चुड़ैल दिख ही नहीं रही थी। छाँव में लेजा कर उन्होने मुझे पानी पिलाया। और हम आगे चल दिये। घूमते घूमते शाम हो गयी। करीब छे बजे हम होटल की और लौटने लगे। मैने मूड कर देखा तो पाया की वह चुड़ैल अब भी हमारा पीछा कर रही थी। पर वह सिर्फ मुझको ही दिख रही थी। अगले दिन सुबह हमे घर वापिस निकलना था, तो हम डिनर खा कर रात में दस बजे तक सो गए।

होटल में करीब रात के तीन बजे हमारे कमरे का दरवाजा किसी ने खटखटाया। मुझको लगा की कहीं दरवाजे पर वह चुड़ैल ही होगी। इस लिए मैने मंजीत और गोविंद को जगा दिया, और दरवाजा खोलने को कहा। दरवाजा जैसे ही खुला तो हमने देखा की वैटर खड़ा था। उसे देख कर मेरी सांस में सांस आई।वैटर ने मेरा नाम पुकारा… और कहा की आप के पिता बाहर पार्किंग में खड़े हैं। वह आपको नीचे बुला रहे हैं। मैं समजा की शायद पापा मुजे सरप्राइज़ देने जूनागढ़ आ पहोंचे होंगे। मै फौरन दौड़ता हुआ नीचे भागा। और मेरे दोनों दोस्त आँखें मलते हुए फिर से सो गए।

नीचे जा कर देखा तो पापा ही थे। मैं उनसे गले मिला। पर अचानक पापा का रूप बदल गया। और हकीकत में वह तो गिर जंगल वाली चुड़ैल थी। जिसने जाल बिछा कर मुझे वहाँ बुलाया था। मेरे मुह से आवाज निकले उसके पहले वह मुझे बालों से घसीट कर गिर जंगल की और ले जाने लगी। मै तो अधमरा हो गया था। अब मै उस चुड़ैल की कैद मै था, और जंगल में उसी नदी किनारे पड़ा था। वह चुड़ैल मुजे नाखूनों से नौचने लगी। और काटने लगी। जैसे की मै उसका खाना हौं।

तभी अचानक एक विकराल प्रेत आया और वह उस चुड़ैल पर हमला करने लगा। शायद वह दोनों मुजे खाने के लिए ही जगड़ रहे थे। मेरा डर का एहसास मर चुका था। मुझे पता था की अब इन्हीं दोनों मे से एक मेरी जान निकालने वाला है।

भीषण लड़ाई मै उस प्रेत की जीत हुई। और वह चुड़ैल हार मान कर, कराहती हुई अदृश्य हो गयी। अब वह प्रेत मुझे खाने के लिए शायद मेरे पास आ रहा था। उसके पैरों की आहट मै आज भी महेसूस कर सकता हूँ। उसने मुझको मेरे बालों से पकड़ कर खड़ा कर दिया। और घसीटते हुए उसने मुझको हाइ वे पर ला कर फेंक दिया। मै जान लगा कर, भागता दौड़ता होटल तक आया। और अपने दोस्तों को जगा कर, अपने साथ हुई घटना के बारे मै बताने लगा। पर वह दोनों तो इस बात से ही मुकर गए की रात में किसी वैटर ने दरवाजा खटखटाया था, और मैं कमरे से बाहर भी गया था।

शायद मै यह कभी साबित ना कर सकूँ की मैने किस प्रकार का आतंक जेला था। पर उस रात मै मौत के मुह से वापिस आया था। कोई माने या ना माने, येही उस रात की सच्ची हकीकत है। इतना दर्द और तकलीफ सहने के बाद भी मेरे शरीर पर एक भी खरोच का निशान नहीं आया था यह भी एक हैरत की बात थी।

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10 Comments

  1. Sunil July 12, 2016
  2. Ashish Bhatt April 20, 2017
    • Roman October 20, 2017
  3. Ravi June 2, 2017
  4. Zaheer Darbar June 19, 2017
  5. Ranjeet yadav June 24, 2017
  6. Ranjeet yadav June 24, 2017
  7. rakesh roy August 4, 2017
  8. azhar August 29, 2017
  9. Vijay Singh October 26, 2017

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