जयेश मामा का डरावना भूत | Jayesh Mama ka Darawana Bhoot

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मेरा नाम किशन मोतीवरस है। मै सिविल एंजिन्यरिंग की पढ़ाई कर रहा हूँ। वैसे तो मेरा अधिक समय हॉस्टल में ही बीतता है, पर छुट्टीयों में मै पास ही में अपने घर जाफराबाद जाता हूँ। मेरे जयेश मामा एक जी॰ ई॰ बी॰ कर्मचारी थे। मेरे जयेश मामा दिखने में खूब काले और हाइट में लंबे थे। उन्हे खाने में कुछ भी दे दिया जाए वह जानवरों की तरह खा लेते थे। उन्हे स्वाद की कोई समझ नहीं थी। जयेश मामा को शादी का बड़ा चस्का था, पर खुद चांडाल जैसे दिखते थे तो उनके सामनें कोई भी लड़की देखती नहीं थी।

हम जब भी मेले में घुमनें जाते थे तो जयेश मामा घूर घूर कर लड़कियों को ऐसे ताकते रहते थे की उन्हे खा ही जाएगे। बद किस्मती से, पिछले साल बिजली का शोक लगने से उनकी मौत हो गयी थी। हम सारे उनकी शमशान यात्रा में शरीक हुए थे। वहीं मुझे एक भयानक अनुभव हुआ था, जिस के बारे में मै सब को बताना चाहता हूँ।

उस रात दो बझे मेरी नींद खुल गयी,,, शायद किसी नें मुझे आवाज़ दी थी,,, मै चौक गया। उठ कर आसपास देखा तो कोई भी नहीं था। मै फिर से बत्ती बुझा कर सो गया। तभी अचानक किसी नें फिर से मुझे मेरे नाम से पुकारा,,, इस बार मैंने गौर किया तो मुझे समझ आया की यह तो,,, मेरे जयेश मामा की आवाज़ थी।

मुझे यकीन नहीं हुआ की जयेश मामा की आवाज़ इतनी रात मुझे क्यूँ सुनाये दे रही है। कुछ देर बाद मै फिर से सो गया। सोते सोते मेरी नज़र खिड़की के बाहर गयी। वहाँ जो मुझे दिखा,,, उसे देख कर मै तो चौक गया,,, मेरे पसीने छूट गए,,, उस बिजली की तार पर मेरे जयेश मामा बैठे थे। जो में देख रहा था उसे देख कर, मुझे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था।

तभी अचानक मेरा मोबाइल बझ उठा। मैंने पसीना पोंछते हुए फोन रिसीव किया। वह फोन मेरी माँ का था। माँ नें रोते हुए मुझे कहा की तेरे मामा की शोक लगने से मौत हो गयी है। तू हो सके उतना जल्दी हॉस्टल से घर आ जा। मै फ्रेंड की बाइक ले कर फौरन रात में ही घर पहुंच गया। फिर वहाँ से हम

जयेश मामा के घर गए, वहाँ उनकी अधजली लाश देख कर मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए।

मेरे पापा वही थे, मैंने उन्हे पूछा की यह सब कब हुआ? पापा नें बताया की करीब तीन घंटे पहले तेरे मामा बिजली के फोल्ट को ठीक करने खंभे पर चड़े थे, तभी अचानक मैं लाइन का करेंट शुरू हो गया, और यह दूर-घटना हो गयी।

मुझे वहाँ खूब रोना आया, चुकी मेरे मामा मेरे दोस्त की तरह थे। मै उनका खूब मज़ाक भी उड़ाता था पर वह कभी बुरा नहीं मानते थे और मेरी हर परेशानी में मेरा साथ देते थे। फिर मुझे हॉस्टल वाली घटना याद आई।

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शायद मैने जयेश मामा के भूत की ही आवाज़ सुनी थी। और खिड़की के बाहर तार पर भी मुझे जयेश मामा का प्रेत ही दिखा होगा। अब धीरे धीरे मेरा शोक (दुख), खौफ और डर में तबदील होता जा रहा था। मुझे पता नहीं था की उनका भूत मरने के बाद मेरे पास क्यूँ भटक रहा था।

यह सब सोच सोच कर मेरे तो पसीने छूट रहे थे। मुझे अंदर ही अंदर डर सता रहा था, की आगे क्या होगा। अगले ही दिन जयेश मामा की अग्नि दाह विधि थी। वहाँ मै भी गया। सारे सगे संबंधी अग्नि दाह के लिए लकड़ियाँ लगा रहे थे। तभी अचानक मेरी नज़र जयेश मामा की लाश की और गयी। मैंने देखा की जयेश मामा के हाथ के पंजे मे कुछ हरकत हुई। शायद उनका पंजा मेरी और उठा और हाथ से मुझे पास आने का इशारा किया।

यह सब देख कर मै पागलों की तरह चीखनें लगा। सब सगे संबंधी दौड़ कर मेरे पास आ गए। मैंने जो भी हुआ था वह सब उन्हे बताया। पर वहाँ किसी नें मेरा विश्वास नहीं किया। सब नें मेरे पापा को बोला की किशन डर गया है इसको घर भेज दीजिये। मेरे पापा फौरन उसी वक्त मुझे घर ले आए। और वापिस शमशान चले गए।

फिर उस रात मुझे ज़ोरदार भूखार चड़ गया। मेरे पापा मेरे लिए दवाई भी लाये। पर भूखार उतर ही नहीं रहा था। उस रात मुझे जयेश मामा के भूत का डर भी सता रहा था। करीब रात के तीन बझे फिर से मुझे किसी के चलने की आहट सुनाए दी। फौरन मेरी आँखेँ खुल गईं। मैंने देखा की मेरे बिस्तर के पास जयेश मामा बैठे हैं। उनका आधा चहरा जला हुआ था। और वह मेरी और देख रहे थे। उनका भूत देख कर मेरी ज़बान हलक में अटक गयी और सांस फूल गयी।

मै बे-तहाशा काँप नें लगा। मुझे समझ नहीं आ रहा था की मेरे जयेश मामा का भूत हाथ धो कर मेरे पीछे ही क्यूँ पड़ा है। कुछ देर बाद जयेश मामा नें अपनी जेब में हाथ डाला और कुछ निकाल कर मेरे बिस्तर पर रखा,,, फिर अचानक उनका भूत एक जटके में वहाँ से गायब हो गया। मै तो वह सब देखता ही रह गया। और यका-यक मेरा भूखार भी उतर गया।

मैंने तुरंत बत्ती जलायी,,, और बिस्तर पर देखा तो वहाँ 16GB की नयी पेन ड्राइव पड़ी था। अब पूरी बात मुझे समझ आ चुकी थी। की क्यूँ मेरे जयेश मामा मर कर भी बार बार मेरे पास आ कर मुझ से बात करना चाहते थे। उन्हे मुझ को मेरी गिफ्ट मुझे सौपनी थी।

“दो दिन पहले मेरे जयेश मामा मेरे हॉस्टल आए थे और मेरे एक्जाम में अच्छे मार्क लाने पर खुस हो कर, उन्होने मुझसे वादा किया था की वह मुझे नयी पेन ड्राइव गिफ्ट करेंगे। और हस्ते हुए मैंने उन्हे कहा था की इस बार कोई बहाना मत बनाना, मर भी जाओ तो भी, मेरा गिफ्ट ज़रूर मुझ तक पहुंचा देना।“

मेरे जयेश मामा नें मर कर भी अपना वादा निभाया। उस दिन मुझे पता नहीं था की कुछ दिनों बाद मेरे जयेश मामा का साथ हमेशा के लिए छूट जाएगा – किशन मोतीवरस

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2 Comments

  1. inna July 22, 2017
  2. ashim patra July 31, 2017

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