फार्म हाउस पर हुआ दादाजी के साए से सामना Encounter with Grandfather’s Ghost at Farm House

मित्रो मेरा नाम आकाश है और मै उडीसा का रहने वाला हु | आज मै आपको मेरे और मेरे दोस्तों के साथ घटी सच्ची घटना से आपको रूबरू करवाना चाहता हु |Encounter with Grandfather's Ghost at Farm Houseमित्रो उस समय मै कॉलेज के प्रथम वर्ष में था | हम तीन दोस्त उमेश और आशीष हमेशा साथ रहते थे और घुमा करते थे | मेरे दोस्त उमेश के पिताजी हमारे प्रदेश के एक चर्चित नेता थे और उनके कई फार्म हाउस थे जहा वो छुट्टिया बिताया करते थे | एक दिन मैंने उमेश से उसके फार्म हाउस पर घुमने की बात कही तो उसने हां कह दिया |

हम तीनो दोस्त उमेश की कार में एक दिन उस फार्म हाउस के लिए निकल गए | वो फार्म हाउस हमारे घरो  से 20 किमी दूर एक सुनसान जंगल के करीब था | जब उस फार्म हाउस में पहुचे तो देखा कि ये तो बहुत पुराना है | उमेश ने बताया कि ये फार्म हाउस मेरे दादाजी ने बनवाया था और पिछले पाच सालो से बंद पड़ा  है | उस फार्म हाउस की रखवाली एक गार्ड करता था | अब हम अंदर पहुचे तो देखा कि बंगला तो काफी आलीशान था  लेकिन काफी जर्जर हो चूका था | उस बंगले को देखकर अनुमान लगाया जा सकता था कि आज से 40 साल पहले ये बंगला कितना सुंदर लगता होगा |

हम उस बंगले के एक एक हिस्से में घूम रहे थे तभी हमने देखा कि एक कमरे के बाहर बहुत भारी ताला लगा हुआ था | हमने उमेश से पूछा कि यहा ताला क्यों लगा तो उमेश ने कहा कि उसके पिताजी ने उसको बताया किउसके दादाजी ने 5 साल पहले इसी कमरे में फांसी लगा के जान दे दी थी हालाँकि उनकी फांसी का कारण कोई पता नहीं लगा पाया लेकिन तब से ये दरवाज़ा बंद पड़ा है |

अब हम सभी एक बड़े हाल में जाकर बैठ गये औरगपशप करने लगे | तभी आशीष ने कहा कि मै वाशरूम जाकर आता हु | हमने वही बैठकर मस्ती मजाक करना शुरू कर दिया | आशीष को गए काफी देर हो गयी थी वो नहीं आया तो हमने सोचा कि वो कही बाहर घुमने तो नहीं चला गया | हम उसको ढूंढने बाहर गए और गार्ड से पूछा तो उसने बताया कि यहा तो कोई नहीं आया |

अब हम वापस अंदर आकर घर का हर कोना ढूंढने लगे तभी उमेश की नजर उसके दादाजी के कमरे की तरफ पडी तो देखा कि उस कमरे का ताला टुटा हुआ था | हम डरते हुए उस दरवाज़े के करीब आये और दरवाज़ा खोला तो देखा कि आशीष उस कमरे के एक कोने में दुबका हुआ बैठा था | हम उसके पास गए और उससे पूछा “अरे भाई ये ताला तोड़ तू यहाँ कैसे आ गया ” तभी आशीष ने उपर देखा तो उसकी आँखे एकदम लाल थी और वो एक अजीब भारी आवाज़ में बोला “भाग जाओ यहाँ से ” | हमने सोचा वो मजाक कर रहा है लेकिन वो तभी उठा और चाक़ू लिए उनको मारने के लिए दौड़ पड़ा |

हम दोनों डरते कांपते हुए वहा से भागने लगे वो भी हमारे पीछे आया और जैसे ही वो कमरे से बाहर निकला बेहोश होकर गिर पड़ा | हमने तुरंत घर पर फ़ोन किया और घरवाले एम्बुलेंस लेकर आ गये | वो दिनों तक बेहोश  रहा और जब उसे होश आया वो सामान्य था | डॉक्टर ने चक्कर आना उसकी बेहोशी का कारण बताया | हमने घरवालो को ये घटना कभी नहीं बताई लेकिन हमने जब आशीष से पूचा तो उसने बताया कि जब उसके दादाजी के कमरे से गुजर रहा था तो उस कमरे से कुछ आवाज़े आ रही थी उसने जैसे ही सब सुनने के लिए दरवाज़े के कान लगाया उसके बाद से उसको कुछ याद नही रहा उअर वो सीधा हॉस्पिटल में ही जागा |

इस घटना के बाद हम उस फार्म हाउस पर कभी नहीं गये | हमको एहसास हो गया था कि उमेश के दादाजी की आत्मा आज भी उस फार्म हाउस में मौजूद थी जो किसी का इन्तेजार कर रही थी

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