खेल खेल में हुआ पहाडी लडको की आत्मा से सामना

151018आज मै एक सच्ची घटना के बारे में बताने जा रहा हूँ। मेरा नाम सुरेश है, और मै उत्तर प्रदेश का रहने वाला हूँ। मेरे पिताजी पान की दुकान चलाते हैं। और मै कॉलेज के पहले साल में हूँ। बचपन से ही मुझे क्रिकेट खेलने का शौख है। हमारे पड़ौसी के बेटे विशाल के साथ मै हमेशा क्रिकेट खेलने जाया करता हूँ। पर दो वर्ष पहले मेरे साथ कुछ ऐसी अजीब घटना हुई जिस के कारण मै काफी सदमे में आ गया था।

मै और विशाल दोपहर में घर के पास एक मैदान में खेलने जाने लगे, तभी मुजे एहसास हुआ की हमारे साथ कोई और तीसरा भी चल रहा है… जो ठीक हमारे पीछे है। मैने फौरन पलट के देखा तो कोई ना दिखा। मुजे लगा मेरा भ्रम होगा। पर आगे बढ़ने पर विशाल को भी ठीक ऐसा ही लगा। जेसे कोई हमारा पीछा कर रहा हो और हमे दिख ना रहा हो। मैदान में दूसरे दोस्तों के साथ हम मिल कर मैच खेलने लगे। पहले फील्डिंग आई तो जटसे मैने bounty का स्थान चुन लिया। खेल आरंभ हुआ। गेंदबाजी विशाल कर रहा था। पर मुजे विशाल के साथ एक और लड़का उसके पीछे पीछे घूमता दिखाये देने लगा जिसे हम जानते ही नहीं थे।

वह लड़का काफी डरावना दिखता था। और कद काठी से ऊंचा तगड़ा था। मैने फौरन विशाल को आवाज लगायी के तेरे पीछे देख कौन है? विशाल मुजे देख कर उल्टा जौर से चिल्लाया…. क्यूँ की उसने भी मेरे पीछे किसी पहाड़ी लड़के को खड़ा देखा… सारे लड़के हम दोनों पर च्चिल्लाने लगे क्यूँ की वह सब खेल शुरू करना चाहते थे। हम यह घटना अनदेखी कर के खेल में मगशुल हो गए। पर घर लौटते वक्त दोनों के हाथ पाँव डर से कांप रहे थे। और शाम को पांच बजे घर लौटते वक्त भी हम दोनों को यह महसूस हो रहा था, की कोई तो पीछे चल कर आ रहा है। लेकिन दोनों में से किसी ने मूड कर पीछे देखने की हिम्मत नहीं की।

विशाल अपने घर गया। और में अपने घर आ कर खाना खा कर सो गया। रात मै मेरी नींद खुल गयी। देखा तो मेरा बल्ला हवा मै जुल रहा है। और मेरे कमरे के कोने मै वही डरावना पहाड़ी लड़का मुजे ताक रहा था। मै तो डर के मारे रोने लगा… वह डरावना लड़का मुजे बोला की “चलो क्रिकेट खेलना है… बाहर आओ… मेरा बैटिंग बाकी है” मै बिस्तर से हिला ही नहीं, फटी आँखों से उसे देखता ही रह गया… उसने फिर वही शब्द गुस्से में दहोराए… इस बार पलंग पर लेटे लेटे ही मेरी चीख निकल गयी… पूरा घर जाग गया, और वह लड़का अदृश्य हो गया।

अगले दिन विशाल मुजे मिला तो उसने भी मुजे कहा की मैने भी उसी लड़के को अपने घर में देखा जो मैदान में ठीक bounty पर उसे मेरे पीछे खड़ा हुआ दिखा था। यह बात हमनें अपने परिवारों को बताई पर दोनों परिवार हमारा मज़ाक उड़ाने लगे। और हम मस्ती कर रहे हैं ऐसा बोलने लगे। आगे चल कर उन दोनों लड़कों का आतंक बढ्ने लगा। वह लड़के हमे रोज़ दिखने लगे। और स्कूल जाते आते, खेलने जाते आते हमारे पीछे आने लगे। और अब तो उन्होने हमे पीछे से हल्के हल्के धक्के भी देना शुरू कर दिया था। मै और विशाल दोनों खौफ मै जी रहे थे। हमने खेलने जाना भी छौड़ दिया। और पूरा दिन घर पर बिताने लगे। यह देख कर हमारी तकलीफ पर घर वालों ने ध्यान देना शुरू किया।

उन्हीदिनों मेरी नानी कुछ दिनों के लिए हमारे घर रहने आई थी। नानी ने विशाल के माता-पिता और विशाल को हमारे घर बुलाया। और मेरे माँ-पापा को भी समजाया की मुज पर और विशाल पर किसी लड़कों की भटकती  आत्माओं का साया हो सकता है जिसे मुजसे और विशाल से दूर करना काफी ज़रूर है। क्यूँ की वह हमे नुकसान भी पाहोंचा सकते हैं। नानी ने मुजे और विशाल को घर के आँगन मै बैठा कर हमारे ऊपर से नींबू और हरी मिर्च सात बार घूमा कर नज़र उतारी और हनुमान चालिशा और गायत्री मंत्र बोल कर, पवित्र गायत्री मत्र वाला जल हमें पिलाया। उस दिन के बाद कभी भी ना तो मुजे वह लड़का दिखा नहीं विशाल को वह दूसरा वाला लड़का दिखा।

मेरी नानी नै हमारी तकलीफ दूर कर दी। *लव यू नानी*

“हमारे गाँव के बुजुर्ग लोग बात करते हैं की, वह दोनों भटकते लड़कों की आत्मा है। खेल में हुए जगड़े के गुस्से में उन दोनों लड़को नै मिल कर धोके से मैदान के पास स्थित बावली में एक मासूम लड़के को धक्का दे दिया था” और अपनी इस करतूत का पता चल जाने पर डर के मारे उन दोनों नै भी उसी बावली (कुइया) में कूद कर अपनी जान दे दी थी।

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