वॉटर पार्क में घूमती रूह | Encounter With Ghost in Water Park

Encounter With Ghost in Water Parkइम्तिहान खतम होते ही मैंने पापा के सामने अपनी फरमाइश रख दी थी, की मुझे वॉटर पार्क घुमनें जाना है। इस बार तो माँ भी मेरे साथ थी, चूँकि तीन साल से हम कहीं घुमनें नहीं गए थे। मेरे पापा पुलिस ऑफिसर है तो उन्हे छुट्टी काफी कम मिल पाती है। वैसे मेरा नाम मिली है। और मैनें अभी अभी बारहवि कक्षा पास की है। मै जो किस्सा बताने जा रही हूँ, वह मेरी पिछली छुट्टीयों के दौरान ही मेरे साथ घटा था।

उस दिन सुबह करीब दस बझे मै, पापा और माँ शांतादेवी वॉटर पार्क में पहुंचे। वॉटर पार्क के गेट पर एक बूढ़ा सा चौकीदार था, जो मुझे अजीब नज़रों से घूरे जा रहा था। मैंने फौरन पापा से इस बात की शिकायत की। मेरे पापा काफी गुस्से वाले इंसान है। वह तुरंत उसके पास गए और उसे काफी डांटा और धमकाया। फिर हम तीनों वाटेर पार्क के अंदर चले गए।

अभी मै स्विमिंग पूल में उतरी ही थी, की तभी वहाँ मेरी ही उम्र की एक लड़की मेरे पास आई, उसने मुझे कहा की क्या तुम मुझको तैरना सिखाओगी…? तो मैंने उसे हसी-खुशी हाँ कह दिया। और मै उसे तैरना सीखानें में व्यस्त हो गयी। मेरे पापा और माँ पास में ही रिलैक्स चैर पर बैठे थे। तभी अचानक पापा नें मुझे आवाज़ लगाई, पापा नें कहा की वह बाहर से कुछ खाना लाने जा रहे हैं और माँ भी उनके साथ जा रही है। उन्होने कहा की मै वहीं पूल के पास ही रहूँ।

कुछ ही देर में उस लड़की को अच्छा खासा तैरना आ गया। अब हम दोनों मस्ती में साथ साथ तैर रहीं थीं। तभी अचानक मेरी नज़र गेट के पास गयी, वह बूढ़ा चौकीदार अब भी वहाँ से मेरी ही और ताके जा रहा था। अब मुझे उसकी इस हरकत से खौफ महेसूस हो रहा था। चूँकि पापा और माँ बाहर गए थे, और पापा नें उन्हे धमकाया भी था। अभी मै सोच ही रही थी की… क्या करूँ,,, तभी अचानक मेरे साथ तैर रही उस लड़की नें पीछे से अचानक मेरा सिर पानी के अंदर डुबो दिया। मेरे तो नाक में पानी चला गया। पानी से बाहर आ कर मै उस पर खूब गुस्सा हुई। वह लड़की फौरन मुझसे माफी मांगने लगी और बोली की मै तो मज़ाक कर रही थी।

उस लड़की की इस अजीब हरकत से भी मै सदमें मे थी। मेरे दिल की धड़कनें दुगनी तेज़ी से धड़कनें लगी। अब मै पानी में नहीं रहेना चाहती थी, पता नहीं क्यूँ पर कुछ जी घभरा रहा था। मै फौरन पुल के किनारे आ कर बैठ गयी। वह लड़की अभी भी पानी में थी और बार बार मुझे पानी में आने को मिन्नते कर रही थी। उसकी उस हरकत के लिए मैंने उसे माफ भी कर दिया था पर पता नहीं क्यूँ वह मेरा पीछा ही नहीं छौड़ रही थी। उसका दिल रखने के लिए मै फिर से थोड़ी देर पुल में उतरी।

पुल के अंदर जाते ही उसने मुझे कमर से पकड़ लिया और पुल के बीछ ले गयी। मैंने उसे वहीं कहा की, अगर पिछली बार की तरह कोई शरारत की तो मै अपने पापा को बोल दूँगी। इस बार उसनें मुझे जो जवाब दिया उसे सुन कर मेरे तो हौश उड़ गए।… उस लड़की नें कहा… की….

तेरे पापा के आने तक मै तुझे ज़िंदा थोड़ी रहेने दूँगी…. मेरे पापा को बुरा-भला कहने वाले की बेटी आज मेरे हाथों से यहीं मरेगी…

इतना बोल कर उसने मुझे अचानक फिर से पानी के अंदर डुबोना शुरू कर दिया। पानी में मेरी साँसे उखड़नें ही लगी थीं, तभी pool security गार्ड की नज़र पूल पर पड़ी और जब उसनें देखा की मै अचानक पानी की सतह से गायब हो गयी हूँ तो उसनें फौरन मुझे पानी से बाहर निकाल लिया और तभी वह रहस्यमयी लड़की भी गायब हो गयी। मेरी जब आँखें खुली तो मेरे पापा और माँ मेरे सामने थे। मैने फौरन सारी हकीकत पापा को बताई।

तुरंत ही पापा और माँ वहाँ से मुझे वॉटर पार्क अथॉरिटी ऑफिस में लाये। और वहाँ पापा नें वॉटर पार्क के गेट को बंद करा दिया, उस बूढ़े चौकीदार को भी ऑफिस में बुला लिया। और पूरे वाटेरपार्क में उस लड़की की खोज कराई। पर वहाँ उस रहस्यमई लड़की का कोई पता नहीं चला। पापा नें अब उस बूढ़े चौकीदार का गिरेबान पकड़ लिया, और उसे दो तीन थप्पड़ जड़ दिये। चूँकि वही मुझे शुरुआत से घूरे जा रहा था।

वॉटर पार्क वालों नें बड़ी मुश्किल से पापा को शांत कराया। उसी हड़बड़ी में उस बूढ़े चौकीदार की जेब से उसका पाकिट गिर गया। उसमें उसी लड़की की फोटो थी जिसने मुझे पानी में डुबोने की कौशीस की थी। फोटो देख कर पापा नें पूछा की क्या येही वह लड़की थी, तो मैंने उन्हे हाँ कहा। अब पापा किसी के रोके नहीं रुकने थे। उन्होने वहीं अपनी बैल्ट निकाल कर उस चौकीदार को पीटना शुरू कर दिया। और उसे पूछने लगे की बता तेरी बेटी कहाँ है…? ये तेरी ही बैटी है ना…? जल्दी बोल वरना आज तुझे ज़िंदा नहीं छोड़ूँगा। पापा पुलिस वाले हैं यह वहाँ सब को अब पता चल गया था इस लिए कोई भी बिछ में नहीं पड़ना चाहता था।

खासते खासते उस बूढ़े चौकीदार नें अपनी जेब से एक परची निकाली। उस कागज़ के टुकड़े को खोलनें पर हमें पता चला की वह उसी लड़की का death certificate था जिसनें मुझे पानी में डुबोने की कौशीस की थी। पापा को सारी बात समझ में आ गयी। उन्होने उस बूढ़े चौकीदार से माफी मांग ली और हम फिर उस वॉटरपार्क से घर लौट आए।

“वॉटर पार्क में अंदर जाते वक्त बूढ़ा चौकीदार इस लिए मेरी और घूर के देखे जा रहा था चूँकि उसे मुझ मै अपनी बैटी नज़र आ रही थी। उसकी बेटी जब मरी तब मेरी ही उम्र की ही थी। और पापा नें उसे धमकाया यह उसकी बेटी की भटकती रूह से बर्दाश्त नहीं हुआ होगा, इस लिए शायद उसनें मेरी उम्र की लड़की का रूप ले कर मुझ पर हमला किया।”

मुझे आज उस लड़की की रूह से कोई शिकायत नहीं है, चूँकि अपनें पापा के अपमान पर शायद मुझे भी इतना ही गुस्सा आता। हमारे साथ जो हाथसा हुआ उसमें किसी का दोष नहीं था, पर फिर भी हम सब नें तकलीफ भोगी।

3 Comments

  1. saurabh May 11, 2017
  2. vikas sharma June 8, 2017
  3. Sandeep October 20, 2017

Leave a Reply