मनहूस दिन – छिछले पानी के अंदर मौत का भयानक मंजर

मेरा नाम रणविजय बादल है | मेरे पिता एक बिजली कंपनी में कर्मचारी हैं | आज से करीब एक महीने पहले की बात है, माँ नें मुझे मंडी जा कर सब्ज़ी लाने को कहा | मैं अपना काम निपटा कर बाज़ार की और जाने लगा, तभी अचानक मुझे ज़ोर ज़ोर से एक कुत्ते के रोने की आवाज़ आने लगी | मैंने पीछे मुड़ कर देखा तो, पता चला की वहां पर एक अंडर कंस्ट्रक्शन मकान था | मुझे लगा की भूख के मारे कुत्ता रो रहा होगा | इस लिए, सब्ज़ी ले कर आते वक्त, मैं पारले बिस्कुट का पैकिट ले कर, उस मकान की और जाने लगा | ताकि उस कुत्ते को कुछ खिला सकूँ |

अभी में मकान के दरवाज़े तक पहुंचा तो, और ज़ोर ज़ोर से कुत्ता रोने लगा | इसके साथ साथ उस मकान की खुली सीवेज (बन रही खुली टंकी) का छिछला पानी ज़ोर ज़ोर से उछलने लगा | यह सब देख कर मेरे हाथ पाँव फूल गए | मैं सब्ज़ी का थैला और बिस्कुट वहीँ गिरा कर उस खुली टंकी की और भागा | मुझे लगा कहीं पानी भरी टंकी में कुत्ता डूब रहा होगा | लेकिन जब मैंने वहां अंदर झाँका तो मेरी रूह काँप गयी |

उस ज़मीनी टंकी के खड्डे में एक काला कुत्ता सिसक रहा था | पहले तो मुझे लगा की, वह उसमें गिर गया होगा | लेकिन थोड़ी देर वहीँ रहने पर मुझे खौफ़नाक हकीकत का पता चला | कुत्ता एक कोने में सटा हुआ था फिर भी, उसका पैर बार बार पानी के अंदर खिंचा जा रहा था | मैंने थोड़ी हिम्मत कर के आसपास से छत्त भरने का लट्ठा उठाया और, उस टंकी के छिछले पानी में घोपने लगा | वोह मेरी हिम्मत थी या बेवकूफी ये पता नहीं लेकिन, मैं वह सब करे जा रहा था |

लगातार लट्ठा छिछले पानी में घोपने के बाद मुझे एहसास हुआ की पानी के अंदर लट्ठे को कोई पकड़ रहा है | यह सब देख कर मेरे पसीने छुट गए | मैंने जटके से लट्ठा छोड़ दिया | फिर अचानक एक भयानक घुर्राहट वाली चीख सुनी | उसी वक्त मेरी नज़रों के सामने वह डरा हुआ कुत्ता छिछले पानी के निचे खिंच गया | और दुसरे ही पल में, मेरे सामने उस कुत्ते का कटा हुआ मुंड पानी में तैरने लगा |

यह सब देख कर,,, मैं फ़ौरन वहां से भागा और नाके पर जा कर ज़ोर ज़ोर से चीखने लगा | लोग इकठ्ठा हुए | मैं सब को ले कर उस टंकी के पास गया | वहां पर जा कर देखा तो कुछ भी नहीं बचा था | शायद उस अंजान शक्ति नें कुत्ते का मुंड भी चबा लिया होगा | मैं उस वक्त कुछ भी साबित नहीं कर पाया | लोगों नें मेरा खूब मज़ाक उड़ाया | फिर मैं घर चला आया |  उस खौफ़नाक किस्से के बारे में बात करते हुए आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं | कोई माने या ना माने मुझे पक्का यकीन है की उस खड्डे में कोई भयानक शक्ति मौजूद है |

मुझे इस बात पर और पक्का यकीन तब हुआ जब, मैंने वहां एक मज़दूर की मौत की खबर सुनी | आस पडौस के लोग बताते हैं की चप्पल की पट्टी टूटने से वह गिर कर मरा | लेकिन मेरा दिल जानता था की उस जगह पर क्या चीज़ मंडरा रही है | कहा जा रहा है की उस मज़दूर का एक्सीडेंट होने के बाद वह उसी खुले हुए सीवेज खड्डे में गिरा था जहाँ मैंने वह दिल देहला देने वाला मंज़र देखा था | मुझे एक बात बहुत परेशान करती है, जब वह मकान बन जायेगा तो वहां रहने वाले लोगों की क्या हालत होगी |

मैंने अपने बुरे अनुभव की बात फैलाना शुरू किया तो, मेरे घर पर ही मुसीबत आन पड़ी | उस मकान का बिल्डर घर पर आ धमका | और फिर, मकान को बदनाम करने की शिकायत मेरे पापा से करने लगा |  उस किस्से की वजह से पापा नें पहली बार मुझ पर हाथ उठाया | अब मैं घर पर रहना नहीं चाहता था | इसी लिए मैंने हॉस्टल ले लिया | फिर मैंने सोचा लोगों को अपने इस डरावने अनुभव के बारे में बताना चाहिए | इसी लिए अपनी सच्ची कहानी इंडियन घोस्ट स्टोरीस वेबसाइट को भेज रहा हूँ – आशा हैं मेरा पोस्ट पब्लिश किया जायेगा

3 Comments

  1. LOKESH KAITHWAS October 22, 2019
  2. asha October 30, 2019
  3. sandeep rai December 1, 2019

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