जानवरों की जान का दुश्मन प्रेत Animals Captured by Ghost

Animals Captured by Ghostमित्रो मेरा नाम अरमान है और विजयनगर में हमारा घर और बागीचा है, मेरे पिता पोस्टमेन हैं। मेरे दादा बागीचे की देखभाल करते हैं। और मै  साइन्स पढ़ता हूँ। हम सब हमारे दादाजी के बनाए मकान में साथ रहते हैं। हमारे दादाजी का बनाया हुआ सुंदर बागीचा घर के पास ही है। वहीं खेल कूद कर मेरा बचपन बीता है।

हमारे पिताजी हमेशा कहा करते हैं की दुनियाँ में हम इन्सान अकेले नहीं है। इस धरती पर हमारे साथ बहुत सारी अंजान शक्तियों का वास है। दिन पर दिन इन्सानों की संख्या बढ़ती जा रही है, इसी लिए भूत प्रेत और इन्सानों की मुठभेड़ें भी बढ़ती जा रही है। हमे पता नहीं था की एक दिन हमारे पिताजी की कही हुई यह बात वाकय में सच हो जाएगी। मेरे दादाजी के बागीचे में घूमते प्रेत ने जब हमारे पालतू जानवरों की जान लेना शुरू किया तब हमारे पूरे परिवार का दिल डर के मारे काँप उठा था।

एक दिन की बात है जब हमारे बागीचे में बंधी गाय बेहोश हो गयी। हमे लगा शायद बीमार होगी। डॉक्टर को बुलाया तो गाय फौरन जाग कर खड़ी हो गयी, और डॉक्टर को मारने उसके पीछे दौड़ गयी। उस गाय ने जानवरों के डॉक्टर को तीन बार हवा में उछाल दिया। हमे उस डॉक्टर के लिए एंबुलस बुलवानी पड़ी। फिर उसी रात अचानक वह गाय मर गयी।

हम सब इस घटना से सदमे में आ गए थे। पर प्रेत का आतंक तो अभी शुरू ही हुआ था। अगले दिन हमारी बिल्ली को उसने शिकंजे में लिया। सुबह 5 बजे अचानक हमारी बिल्ली चिल्लाने (मिमियाने) लगी। हमे लगा की उसने कुत्ता देख लिया होगा। पर ऐसा नहीं था। जब बिल्ली ज्यादा शोर मचाने लगी तो मेरे पिता, और में उठ गए, और बरामदे में पड़ताल करने निकले। वहाँ हमने बिल्ली को देखा तो हमे हौश उड़ गए।

हमारी पालतू बिल्ली को किसी अद्रश्य शक्ति नें पुंछ से लटका कर उठा रखा था। यह एक दिल दहेला देने वाला मंज़र था। मेरे पापा तुरंत लटकती बिल्ली की और दौड़े। तो उस अंजान शक्ति ने बिल्ली सीधे मेरे पापा की और फेंकी। और सारा माहौल वहाँ डरावना हो गया।

हमारी बिल्ली उस वक्त मरी तो नहीं पर, डर के मारे पागल सी गुमसुम हो गयी। उसने खाना पीना छौड़ दिया। और एकाद दो दिन में वह भी मर गयी। मैने और पिताजी ने यह बात दादाजी को बताई पर वह भूतों प्रेतों में विश्वास करते ही नहीं थे।

एकाद हफ्ता बीता तो प्रेत का कहर और बढ्ने लगा। हमारे बागीचे के पैड पर रहने वाले परिंदों को उसने मारना शुरू कर दिया। हर रोज दो तीन मारे हुए परिंदे हमारे बागीचे में पाये जाने लगे। मुजे और पिताजी को डर था की कहीं यह प्रेत हम लोगों पर हमला करना शुरू ना कर दे। दादाजी बाहर गाँव गए थे तो, पिताजी एक दिन एक तांत्रिक को ले आए। ताकि पता चल सके की वहाँ बागीचे में है क्या।

तांत्रिक ने जैसे ही बागीचे में कदम रखा तो तो किसी अदृस्य शक्ति ने उसके दाढ़ी के बाल पकड़ लिए, और वह उसे घसीटने लगा। उस भयानक मंज़र को देख कर मुजे और पिताजी यकीन हो गया की यह प्रेत सिर्फ जानवरों को ही नहीं इन्सानों को भी नुकसान पहोंचाता है। मैने और पिताजी ने मिल कर उस तांत्रिक की जान उस प्रेत से बड़ी मुश्किल से छुड़ाई।

वह तांत्रिक बोला की यह प्रेत मेरे बस का नहीं है, आप लोग किसी अघोरी तांत्रिक को बुलाओ जो की प्रेतों की बली देता हो। हमने फौरन उसके कहे अनुसार एक प्रेतों की बली देने वाले अघोरी तांत्रिक को बुला लिया। बागीचे में घुसते ही इस नए वाले अघोरी तांत्रिक ने किलों वाली छड़ी निकाल ली और वह छड़ी हवा में भाँजने लगा। अचानक विकराल आवाज़े आने लगी जैसे की यह तांत्रिक उस प्रेत को उस छड़ी से पीट रहा हो।

किलों वाली छड़ी से घंटे भर उस प्रेत की पिटाई करने के बाद अघोरी तांत्रिक ने उस प्रेत को अपनी खुदकी चौटी से बांध लिया। हमे कुछ दिखा तो नहीं पर उसने ऐसा कहा। पिताजी ने जाते समय उस अघोरी तांत्रिक को पैसे दिये, पर उसने लेने से माना कर दिया। और पिताजी से कहा की हम योगी हैं, व्यापारी नहीं हैं। सांसारिक मनुष्यों को दुष्ट शक्तियों से निजात दिलाना हमारा कर्तव्य है। इसी कार्य के लिए हमने सन्यास लिया है।

उस दयालु अघोरी तांत्रिक ने कहा की अब तुम लोग निर्भय हो जाओ। यह प्रेत अब कभी किसी पशु, पक्षी या इन्सान को नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा। मै आज ही इसकी बली दे कर इसे प्रेत योनि से मुक्त करा दूंगा। यह प्रेत जानवरों से इस लिए घृणा करता है, क्यूँ की इसकी मृत्यु एक हिंसक शिकारी पशु के हमला करने से हुई थी। इसी लिए यह हर एक प्राणी, पशु, पक्षी में अपने शत्रु को देखता है। इन्सानों पर यह तभी हमला करता है। जब कोई इन्सान इसे रोकने या पकड़ने आता है। इतना बोल कर वह चले गए।

हमारे बागीचे में उस दिन के बाद कभी कोई डरावनी घटना हमारे बागीचे में नहीं हुई।

 

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