रिक्शा वाले भुत का डरावना सफर A Riksha Driver Ghost Story in Hindi

A Riksha Driver Ghost Story in Hindiमित्रो मेरा नाम मनीष व्यास है। और मै जयपुर का रहने वाला हूँ। में चोकलेट बेचने वाली एजन्सी के लिए, सेल्स एजेंट के तौर पर काम करता था। दिन भर में मुझे 30 से 50 किमी ट्रावेल करना पड़ता था। और अलग अलग लोगो से मिल कर हमारी प्रोडक्ट के ऑर्डर लेने होते थे और माल पहचाना होता था। कभी कभी एजन्सी का मालिक मुझे बाइक देता और कभी कभी रिक्शे का भाड़ा दे देता था। तीन महीने पहले एक ऐसे भयानक भूत से मेरा सामना हुआ, की तबसे मेंने खौफ और डर के मारे बिस्तर पकड़ लिया है।

हुआ यह था की रोज की तरह सुबह मै पेन, कैल्कुलेटर और ग्राहकों की लिस्ट ले कर बस स्टैंड पर ऑटो रिक्शा का इंतज़ार करने लगा। तभी एक पुराना ऑटो रिक्शा मेरे पास आ कर रुका। मेंने देखा उसके अंदर सफ़ेद कपड़ों वाला घुंगरले लंबे बालों वाला, काला सा, अधेड़ उम्र का इन्सान बैठा था।

रिक्शे वाले ने मुझसे  पूछा की “कहाँ जाना है ”

मेंने उसे कहा की “चार घंटे का काम है। और दस से पंद्रह जगाह पर रुकना होगा।”

वह बोला “ठीक है बैठ जाओ… में बैठ तो गया पर कुछ अजीब महसूस हो रहा था… जैसे कोई मुजे रोक रहा हो उसके साथ जाने से ”

उसने ऑटो रिक्शा चलाना शुरू किया और औडियो टेप बजा ने लगा | वह कुछ तंत्र मंत्र वाले श्लोक बजा रहा था और रास्तों में आने वाले मंदिरों से दूर दूर से ऑटो रिक्शा निकालने लगता और मंदिर देख कर गुस्से से चिल्ला देता था जैसे की उसे कुछ तकलीफ हो रही हो | ये सब देख कर मुझे पक्का यकीन हो गया की यह ऑटो वाला आदमी कुछ गड़बड़ है या तो ये पागल है, या फिर इसके अंदर प्रेत-भूत का वास है |मैंने फौरन उसे ऑटो रिक्षा रोकने को कहा क्योंकि अब मुझे उस से डर लग रहा था |

उसने मुझसे कहा की “भैया ब्रेक काम नहीं कर रहा है चुपचाप बैठे रहो ”

मै चालू रिक्शे में चिल्लाने लगा। वह इन्सान पागलों की तरह ज़ोर से हसने लगा। और फिर वह पूरी तरह से अपनी मुंडी 180 डिग्री घूमा कर मुझे घूरने लगा और बोला की “चिल्लाओगे तो मै तुम्हें अपनी दुनियाँ में ले कर चला जाऊंगा…”

यह सुन कर में सुन्न पड़ गया ,मेरी जबान हलक से नीचे उतर गयी | अब में उस रहस्यमय व्यक्ति के हवाले था|  वह मुझे घंटों तक सुनसान रास्तो पर ऑटो रिक्शा में घूमाता रहाऔर अचानक ऑटो रिक्शा रोक कर मेरी और घूमा… और बोला की ““तुम जैसे ठंडे खून वाले इन्सान का में क्या करूँ… तुम मेरे किसी काम के नहीं… उतर के भाग जा… मेरे ऑटो रिक्शा से… वरना में तुझे यहीं… निगल जाऊंगा… “

मै उस ऑटो रिक्शा से भाग जाना चाहता था पर मेरे पैर जम गए थे। और साँसे थम सी गयी थी। एक लकवाग्रस्त इन्सान की तरह में वहीं लाचार बैठ करडरे जा रहा था और उसे सुने जा रहा था |उसने फिर गुस्से चिल्लाते हुए, अंगूठियों से भरा हुआ पंजा में मेरे सिर पर दे मारा और में किसी गेंद की तरह उछल कर रोड पर जा गिरा… और बेसुध हो गया |

जब मेरी आँख खुली तो में वहीं उसी ऑटो रिक्शा के पास फूटपाथ पर पड़ा था। अपनी घड़ी देखी तो दोपहर के 12 बज चुके थे। और बस स्टैंड पर खड़े लोग नफरत और धिक्कार भरी नजर से मेरी और देखे जा रहे थे। जैसे में कोई शराबी हूँ… और दारू पी कर रोड पर गिरा पड़ा हों |
मुझ में उठने तक की शक्ति नहीं थी। मैंने लेटे लेटे ही अपने दोस्त को फोन कर के मदद के लिए बुलाया। और वह मुजे वहाँ से उठा कर मेरे घर तक ले गया॥ आज भी में डर के साये में हूँऔर एक ही डर सताता रहता है की कहीं फिर से उस ऑटो रिक्शा वाले भूत से मेरा सामना फिर हुआ तो में क्या करूंगा |

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